जमीन पर लिटाकर घायलों को टांके लगाए जा रहे हैं। कोई जमीन पर पड़ा दर्द से तड़प रहा है तो किसी को दीवार के सहारे बैठाकर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। घायलों को एंबुलेंस चालक गोद में उठाकर इमरजेंसी तक ले जा रहे हैं। बच्चे रोते-बिलखते जमीन पर बैठे हैं, तो कोई बच्चा पट्टी कराने के बाद जमीन पर ही सोया हुआ है। ये हाल है एलएनजेपी अस्पताल का।
रविवार तड़के हादसे के बाद सुबह साढ़े पांच सरकारी अस्पताल में घायलों को एंबुलेंस चालक लहूलुहान हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां न कोई सुरक्षा कर्मचारी तैनात था और न ही पर्याप्त मात्रा में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए जाने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन मुसीबत के वक्त सुविधाएं मिलना तो दूर अस्पताल के आपातकालीन विभाग के मुख्य द्वार पर न स्ट्रेचर मिला और न ही व्हीलचेयर।
दरअसल, रविवार तड़के करीब साढ़े चार बजे जीटी रोड स्थित गांव खानपुर कोलियां के निकट सवारियों से भरी बोलेरो पिकअप को ट्रक ने पीछे से टक्कर मार दी। जिसमें 10 बच्चों सहित 25 से अधिक मजदूर गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। हादसे में एक महिला मजदूर सहित तीन की मौत हो गई। इससे पहले सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की चार एंबुलेंस घटनास्थल से लहूलुहान अवस्था में मजदूरों को लेकर एलएनजेपी अस्पताल लेकर पहुंची। यहां आपातकालीन विभाग के मुख्य द्वार पर व्हीलचेयर और स्ट्रेचर उपलब्ध न होने के चलते एंबुलेंस चालक संदीप कुमार, प्रदीप, पवन और सरताज ने घायल बच्चों को अपनी गोदी में उठाकर वार्ड तक पहुंचाया और अन्य मजदूरों का सहारा बने।
हादसे में घायलों की 24 से अधिक संख्या देख एक बार तो यहां मौजूद चिकित्सक और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी भी घबरा गए। ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिपाली, सीनियर नर्सिंग अधिकारी निर्मल और सूचना मिलने पर महिला और पुरुष वार्ड से आपातकालीन वार्ड पहुंची स्टाफ नर्स पूजा और नीलम ने घायलों को प्राथमिक उपचार देना शुरू किया। इनके पश्चात आरएमओ डॉ. एसएस अरोड़ा आपातकालीन विभाग पहुंचे और यहां अन्य घायल मजदूरों को प्राथमिक उपचार दिया। यहां वार्ड में भी बेड और स्ट्रेचर की कमी के चलते घायलों को जमीन पर लिटाकर टांके और इंजेक्शन लगाए। मरहम पट्टी के बाद भी बच्चों और मजदूरों ने नीचे जमीन पर लिटाया गया।
अव्यवस्था होने की मिली थी सूचना, लेकिन कराएंगे जांच : डॉ. वर्मा
जिला सिविल सर्जन डॉ. संत लाल वर्मा का कहना है कि खानपुर कोलियां के निकट हुए हादसे के बाद अस्पताल पहुंचे घायलों की रिपोर्ट उन्होंने संबंधित अधिकारी से मांगी थी। आरएमओ डॉ. एसएस अरोड़ा ने अस्पताल में सभी तरह की व्यवस्था होने की बात भी कही थी, लेकिन आपातकालीन विभाग के मुख्य द्वार पर सुरक्षा कर्मचारी की तैनाती के साथ व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की व्यवस्था न होना उनके संज्ञान में नहीं था। वे इस संदर्भ में जांच कराएंगे और भविष्य में ऐसी अव्यवस्थाएं न हो, इसके लिए व्यवस्था की जाएगी।