शाहाबाद। करीब डेढ़ माह तक शांत रही मारकंडा नदी वीरवार को फिर उफान पर आ गई। नदी में 26 हजार क्यूसेक पानी पहुंचा। पहाड़ों पर हुई बारिश के चलते नदी में आए इस पानी ने नदी के तट पर स्थित कठवा और तंगौर गांवों में मार की। इन गांवों में फसलें फिर पानी में डूब गई।
देर शाम तक पानी गांव की सड़कों तक पहुंच गया, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई। कठवा गांव की सरपंच सुखविंदर कौर ने बताया कि डेढ़ माह पहले आई बाढ़ के बाद गांव के किसानों ने खेतों में पानी उतरने के बाद फिर धान की फसल रोपाई की थी, लेकिन आज फिर पानी आने के बाद फसल नष्ट हो गई है। गांव तंगौर निवासी रवि ने बताया कि गांव की सड़कों की हालत बाढ़ के बाद आज तक ठीक नहीं हो पाई है। आज फिर इन पर पानी पहुंच गया, जिससे ये सड़कें और भी खस्ताहाल हो जाएंगी। वहीं गेज रीडर रविंदर के मुताबिक पानी का स्तर अब कम होना शुरू भी हो गया।
इधर कालाअम्ब के गेज रीडर कश्मीरा लाल ने बताया कि फिलहाल पहाड़ों पर बारिश नहीं है। वहां मारकंडा नदी में वीरवार दोपहर तक 4500 क्यूसेक पानी आंका गया है। मारकंडा नदी में बेगना और रुन नदी का पानी भी पहुंचता है, लेकिन अभी इन नदियों में भी पानी की मात्रा कम हुई है। अंबाला के गांव हेमा माजरा में बांध कटाव के कारण गांव सोहता के रस्ते नदी के पानी ने गांव डाडलु और पाडलु के खेतों तक दस्तक दी है। गांव पाडलु के सरन सिंह ने बताया कि वह बाढ़ के बाद दो बार धान रोपाई कर चुके हैं और अब फिर फसल नष्ट होने की संभावना बन गई है। सरन ने बताया कि सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी अधिकारी फसल की गिरदावरी करने नहीं आया है और अब धान की रोपाई संभव हो सकती।