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क्लबफुट बीमारी का कराएं निशुल्क इलाज

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एलएनजेपी अस्पताल में विश्व क्लबफुट दिवस बच्चो को दिए गए जूते। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से विसंगतियों के साथ पैदा होने वाले बच्चों को मुफ्त इलाज दिया जा रहा है। क्लबफुट एक ऐसा ही जन्म दोष है, जिसमे जन्म से बच्चे के पैर अंदर की ओर मुड़ जाते हैं। ये जानकारी विश्व क्लबफुट दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में उप सिविल सर्जन डॉ करुणा ढींगरा ने दी। उन्होंने क्लब फुट बीमारी से ग्रसित बच्चों के मात- पिता को पांच साल तक इलाज करने बारे में जागरूक किया।
ऑर्थोपेडिशियन डॉ. मनु सोनी ने सभी बच्चों की जांच की और चार बच्चों को प्लास्टर लगाया गया, दो बच्चों की टेनोटोमी उपरांत जांच की गई। चौदह बच्चों को क्लब फुट जूते और ब्रेस दिए गए। फिलहाल 48 बच्चों का इलाज जिले के सरकारी अस्पताल में चल रहा है, जिसमे से दो बच्चों के पैर पूरी तरह से ठीक होकर इलाज पूरा हो चुका है। डॉ. सोनी ने बताया कि क्लबफुट से प्रभावित बच्चों का पोंसेटी विधि द्वारा तीन चरणों में बहुत आसानी से इलाज किया जाता है, जिसमे प्रथम चरण कास्टिंग का रहता है, क्लब फुट के बच्चों को लगातार चार से आठ सप्ताह तक हर हफ्ते कास्ट (प्लास्टर) चढ़ाया जाता है।
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दूसरे चरण में टेनोटोमी एक छोटी सी कार्यविधि, जिसमे अकिलीज टेंडन काट दिए जाते हैं जो बाद में सामान्य आकृति में आ जाते हैं। तीसरा चरण ब्रेसिंग का रहता है जोकि तीन से पांच सालों तक चलता है। मिरेकल फीट इंडिया एक गैर सरकारी संगठन है जो क्लब फुट की समस्या के उपचार के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के साथ साझेदारी में काम करता है।
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संस्था क्लबफुट रोगियों को 4-5 साल तक मुफ्त ब्रेस प्रदान करती है जब तक कि उसके पंजे पूरी तरह ठीक नहीं हो जाते हैं। मिरेकल फीट इंडिया की जिला प्रोग्राम एक्जयूकेटिव सुजाता सैनी ने बताया कि मिरेकल फीट इंडिया द्वारा फुट ब्रेसेस पूरे उपचार चक्र के दौरान पैर के लिए बिलकुल निशुल्क प्रदान किए जाते हैं। फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. सुधा अरोड़ा ने बताया कि उपचार प्रोटोकॉल और जागरूकता सामग्री के बारे में जानकारी प्रदान करने के साथ-साथ मुफ्त परामर्श सहायता भी प्रदान की जाती है। विश्व क्लबफुट दिवस पर कुल 20 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ उपस्थित रहे।
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