सेक्टरों में ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले इन दिनों तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज किया जा रहा है। इस अंतर के जिम्मेदार सेक्टरों के निवासी ही हैं। सेक्टरों में लगातार ग्रीन बेल्ट नष्ट होती जा रही है, जिस कारण सेक्टरों का एक्यूआई लेवल भी ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले ज्यादा रहने लगा।
सेक्टर सात में रविवार को दोपहर 12 बजे तापमान मापा गया तो 36/22 डिग्री सेल्सियस था, वहीं शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर गांव उमरी में तापमान 34/20 डिग्री दर्ज किया गया। नए बस अड्डे के सामने एक्यूआई लेवल दोपहर 1 बजे 101 दर्ज किया गया, जोकि संवेदनशील लोगों को बीमार कर सकता है, इसी समय बस अड्डा से 10 किलोमीटर दूर गांव खेड़ी मारकंडा में यह लेवल 98 था, जोकि सामान्य है। ग्रीन बेल्ट में सरेआम पेड़ काटे जा रहे हैं और पार्क बनाकर कब्जों का खेल जारी है।
ग्रीन बेल्ट इस समय कूड़ा डंपिंग स्टेशन का रूप ले चुकी है। सेक्टर-7 या आठ की ग्रीन बेल्ट से हरियाली बिल्कुल साफ है और करीब आधा किलोमीटर के एरिया में बेल्ट के अंदर कूड़ा फैला है। बाकी कसर लोगों ने बेल्ट पर कब्जे कर निकाल दी है। हर कोई ग्रीन बेल्ट की जगह का अपने हिसाब से प्रयोग कर रहा है। कई लोगों ने तो पक्के निर्माण तक कर लिए हैं। बाकायदा, ग्रिल या तार लगा कर कई जगह पर कब्जा कर लिया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि इन्हीं सेक्टरों में अधिकारियों के निवास हैं। रोजाना अधिकारी इसी ग्रीन बेल्ट के पास से होकर गुजरते हैं, लेकिन इस ओर अभी तक किसी का ध्यान नहीं गया। संवाद
सेक्टर सात में 100 फुटी रोड पर करीब ढाई किलोमीटर की ग्रीन बेल्ट में सेक्टर निवासियों ने10 पार्क व 7 पार्किंग बनाई हैं। वहीं बागवानी के पास तो इसे कूड़ा डंपिग जोन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। रविवार को सेक्टर 7 में एक व्यक्ति ग्रीन बेल्ट से सरेआम पेड़ काट रहा था। जब उससे पूछा गया तो कहने लगा कि पेड़ काटकर पार्क बनाएंगे, उससे हरियाली आएगी।
एक तरफ तो जहां सरकार और प्रशासन पर्यावरण के प्रति लगातार लोगों को जागरूक करने पर लगे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर पिपली-थर्ड गेट सिक्स लेन निर्माण के लिए अग्रसेन चौक से लेकर पिपली तक करीब दो किलोमीटर के एरिया की ग्रीन बेल्ट को नष्ट कर दिया गया। सिक्स लेन निर्माण में सड़क के चौड़ीकरण कार्य में ऐसा होना ही था, लेकिन प्रशासन ने ग्रीन बेल्ट के खत्म होने की भरपाई के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया।
सेक्टर तीन वासी शिवांग दत्त शर्मा ने कहा कि सेक्टरों में गांव या कालोनी के मुकाबले पहले ही पेड़-पौधे कम होते हैं, इसलिए यहां ग्रीन बेल्ट बनाई जाती है, ताकि सेक्टर हरा भरा दिखे और बेल्ट में लगे पेड़ पौधों से पर्यावरण शुद्ध हो सके। सेक्टरों की ग्रीन बेल्ट तो बिल्कुल खत्म हो चुकी है। यह सब अधिकारियों की अनदेखी के कारण हुआ है। जिन्होंने ग्रीन बेल्ट पर कब्जे किए हुए हैं उनके खिलाफ प्रशासन को कार्रवाई करनी चहिए।
ग्रीन अर्थ संस्था संचालक नरेश भारद्वाज ने कहा कि सेक्टरों में ग्रीन बेल्ट गंदगी और अवैध कब्जों की भेंट चढ़ चुकी है, जिस वजह से यहां प्रदूषण लेवल भी लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले माह सेक्टर चार के पार्क से कई हरे-भरे पेड़ काट दिए गए थे, जिसकी शिकायत भी की गई और नगर परिषद ने जांच कमेटी भी बनाई। इस कमेटी में हमारी संस्था को भी शामिल किया गया। आज एक माह बीत जाने के बाद भी उन्हें दफ्तर नहीं बुलाया गया और न ही दोषियों का कुछ पता चल पाया।
एसडीएम थानेसर अखिल पिलानी ने कहा कि ग्रीन बेल्ट से कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से पेड़ नहीं काट सकता और न ही ग्रीन बेल्ट में पार्क और पार्किंग बना सकता है। वह संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के आदेश देंगे। वहीं सेक्टर चार के पार्क से पिछले माह जो पेड़ काटे गए थे, उनको लेकर कमेटी ने अब तक जांच कहां तक की है, इसकी भी नगर परिषद से रिपोर्ट ली जाएगी।