नगर परिषद के लिए रोजाना शहर से निकलने वाले करीब 70 टन कूड़े का निस्तारण करना दिन प्रतिदिन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। जगह-जगह विरोध का सामना करने के लिए करीब दो साल पहले नेशनल हाईवे स्थित पिपली चिड़ियाघर के पीछे पांच एकड़ जमीन पर डंपिंग जोन बनाया गया था। दो साल में यह भी फुल हो गया है, जिसके चलते शहर के कूड़े को अब वहां गिराने में समस्या आ रही है। आए दिन नप के 84 टिप्पर व ट्रैक्टर-ट्राली कूड़ा गिराने वहां जाते हैं, लेकिन डंपिंग जोन पर कूड़े की मात्रा ज्यादा होने के कारण वहां की कच्ची सड़क भी गंदगी से अट गई है, जिस कारण टिप्पर आगे तक नहीं जा पा रहे हैं। लिहाजा डंपिंग जोन पर कूड़ा गिराने के लिए कई बार तो तीन-तीन दिन टिप्पर कूड़े से भरकर खड़े रहते हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद अधिकारी इन दिनों नए डंपिंग जोन की तलाश में लगे हुए हैं।
ऐसा नहीं कि मौजूदा डंपिंग जोन पर अब और कूड़ा नहीं गिराया जा सकता, लेकिन आगे पड़े कूड़े को पीछे हटाने के लिए वहां खड़ी दो पॉपलिन मशीनें लंबे समय से बंद हैं। इनके बंद होने का कारण इनकी सेंक्शन न हो पाना है। खुद नगर परिषद के अधिकारियों का भी मानना है कि यदि पॉपलिन मशीन की सेंक्शन हो जाए तो गंदगी को मशीन के जरिए आगे से उठाकर पीछे गिराया जा सकता है, जिससे समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। इससे एक से डेढ़ साल और इस डंपिंग जोन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दो तीन दिन पहले भी जब यहां कूड़ा गिराने के लिए जगह नहीं बची तो दो घंटे पॉपलिन मशीन चलवाकर उसका वीडियो बनाया गया और फिर वीडियो अधिकारियों को भेजकर प्रति घंटे के हिसाब से उसका भुगतान किया गया।
शहर का कूड़ा नगर परिषद द्वारा पहले मथाना में गिराया जाता था। उसके बाद मुकिमपुरा में इसके लिए डंपिंग जोन बनाया गया, यहां करीब दो साल कूड़ा गिराया गया। आसपास के लोगों के विरोध में बाद यहां कूड़ा गिराना बंद किया गया। उसके बाद वर्ष 2019 में नप ने गांव बारना में डंपिंग जोन बनाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध करते हुए गांव का रास्ता ही बंद कर दिया। जिसके बाद 2019 में ही नगर परिषद ने नेशनल हाईवे स्थित पिपली चिड़ियाघर के पीछे करीब पांच एकड़ की जमीन पर डंपिंग जोन बनाया, जोकि दो साल में ही भर गया। इसके अलावा कुछ वर्ष पूर्व एक प्रोजेक्ट भी आया था, जिसके अनुसार शहर का कूड़ा अंबाला भेजा जाता, लेकिन यह योजना सिरे नहीं चढ़ सकी।
कूड़े की मात्रा ज्यादा होने के कारण अब यह हाईवे के पास खड़े वन विभाग के पेड़ों के बीच गिराया जाने लगा है। कूड़े ने पेड़ों की जड़ों को ढक लिया है। हालात अब ऐसे हो चुके हैं कि ये पेड़ कूड़े के कारण सूखने लगे हैं।
बारिश के दिनों में यहां स्थित ओर भी ज्यादा खराब हो जाती है। हाईवे से उतरकर डंपिंग जोन की ओर जाने वाले कच्चे रास्ते पर पानी भर जाता है, जिससे रास्ता ब्लॉक हो जाता है। इस दौरान हुए कीचड़ में से टिप्परों का निकाल पाना बेहद मुश्किल होता है। पानी और मिट्टी सूखने तक शहर से कूड़े का उठान नहीं हो पाता।
नगर परिषद थानेसर के कार्यकारी अधिकारी बलबीर ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने घर के आसपास डंपिंग जोन नहीं बनने देना चाहता, लेकिन फिर भी नप द्वारा नया डंपिंग जोन बनाने के लिए लगातार जगह की तलाश की जा रही है। इसके लिए नप के अधिकारी केएल बठला की ड्यूटी लगाई गई है। वहीं पॉपलिन मशीन की सेंक्शन के लिए फाइल लगाई हुई है। जल्द ही इसकी सेंक्शन मिल जाएगी।