संवाद न्यूज एजेंसी
कुुरुक्षेत्र। अमर उजाला फाउंडेशन, पर्यावरण पहरी डॉ. अशोक वर्मा व द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में महाराणा प्रताप की जयंती पर रक्तदान शिविर लगाया गया। कॉलेज में आयोजित शिविर का शुभारंभ संगीत विभाग की प्राध्यापिका रिचा शर्मा ने अपने मधुर संगीत से किया। मुख्यातिथि कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरुण पुनियानी ने भी रक्तदान किया। शिविर में 26 इकाई रक्त एकत्रित किया गया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।
शिविर में एलएनजेपी अस्पताल की टीम ने ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. विनोद कुमार की अगुवाई में रक्त एकत्रित किया। प्राचार्य डॉ. पुनियानी ने कहा कि रक्तदान महान काम है। इससे जरूरतमंद लोगों की जिंदगी बच सकेगी। शिक्षित और सभ्य समाज न केवल अपना बल्कि दूसरे के भले के लिए भी कार्य करते हैं। रक्तदान सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसे हर नर और नारी को निभाना चाहिए।
डॉ. अशोक वर्मा ने कहा कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। वे भी रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकती हैं। इससे उनके स्वास्थ्य पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। कोई भी व्यक्ति तीन महीने के बाद सुचारू रूप से रक्तदान कर सकता है। इस मौके पर सहायक प्रो. हरभजन सिंह, सहायक प्रो. रजत गुप्ता, सहायक प्रो. डॉ. देवेंद्र सिंह, राजबाला, केडीबी सदस्य सौरभ चौधरी, सोम सचदेवा, विपिन अग्रवाल, पोरस चौधरी सहित अन्य मौजूद रहे।
रक्तदान से बचा सकते हैं किसी का जीवन
लवप्रीत ने बताया कि उसने पहली बार रक्तदान किया है। रक्तदान हम किसी का भी जीवन बचा सकते हैं। खुद रक्तदान करने के साथ हमें अन्य लोगों को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।
रक्तदान से जीवन बचाने में करें सहयोग
निकेत राठौर ने बताया कि पहली बार रक्तदान करना काफी अच्छा रहा। हम रक्तदान करके किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में सहयोग कर सकते हैं। इसलिए रक्तदान को महादान कहा गया है।
आगे भी रक्तदान करता रहूंगा
कॉलेज के सहायक प्रो. डॉ. देवेंद्र ने बताया कि कि वह तीन बार रक्तदान कर चुके हैं। वह अपने विद्यार्थियों को भी रक्तदान करने के लिए प्रेरित करते हैं। रक्तदान से स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है।
घबराहट हुई दूर, रक्तदान करूंगा जरूर
कॉलेज विद्यार्थी कमल ने बताया कि पहली बार रक्त दिया। पहलेे काफी घबराहट हो रही थी। रक्तदान के बाद काफी अच्छा महसूस हो रहा है। अब मेरी घबराहट दूर हो गई है। अब आगे भी रक्तदान जरूर करूंगा।
रक्तदान करना एक सामाजिक कार्य
सहायक प्रो. गौरव कुमार ने बताया वह 17वीं बार रक्तदान कर चुके हैं। वह इसे सामाजिक कार्य मानते हैं। इससे शरीर में किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है। रक्त की कमी से किसी की जान न जाए।
रक्तदान शिविर का आयोजन जरूरी
वाणिज्य विभाग के सहायक प्रो. रजत गुप्ता ने बताया कि वह दूसरी बार रक्तदान कर रहे हैं। कई बार खून की कमी से मरीज की जान चली जाती है। इसलिए रक्तदान करना और शिविर लगाना बेहद जरूरी है।
जीवन बचाना हो सबका ध्येय
राजबाला ने बताया कि वे आठ बार रक्तदान कर चुकी है। रक्त का कोई अन्य विकल्प नहीं है। यह केवल शरीर में उत्पन्न होता है। इसकी कमी से किसी की जान न जाए, सबका यह ध्येय होना चाहिए।
सभी को रक्तदान करना चाहिए
सहायक प्रो. हरभजन सिंह ने बताया कि वह 11वीं बार खून दान कर रहे हैं। मेरा सुझाव है कि हम सभी को रक्तदान जरूर करना चाहिए। रक्त देने से हम कमजोर नहीं होते बल्कि हमारा स्वास्थ्य बेहतर हो जाता है।
रक्त का नहीं कोई मोल
सहायक प्रो. जतिन ने बताया कि उन्होंने पहली बार रक्तदान किया है। रक्त का कोई मोल नहीं है। देखा जाए तो दुनिया में रक्त सबसे अनमोल है। रक्तदान के बाद होने वाले अनुभव से सुखद कुछ नहीं है।
रक्तदान एक महादान
प्राचार्य अरुण पुनियानी ने बताया कि उनके कॉलेज में रक्तदान शिविर लगना गौरव की बात है। रक्तदान महादान है। परिवार का मुखिया होने के नाते सबसे पहले मुझे रक्तदान करना है ताकि स्टाफ व विद्यार्थी भी रक्तदान करें।
द्रोणाचार्य डिग्री कॉलेज में आयोजित शिविर में रक्त देते रक्तदाता। संवाद- फोटो : Kurukshetra