संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। सर्किट हाउस के पास वीआईपी रोड (100 फुटा रोड) पर आखिरकार 21 साल बाद भूमि मालिक ने अपना कब्जा ले लिया। अदालत के आदेश पर जिला प्रशासन ने सोमवार दोपहर कांशीराम को उसके प्लॉट का कब्जा सौंपा। कांशीराम ने भी एक तरफ कंटीली तार बांधकर शहर के प्रमुख वीआईपी रोड को बंद कर दिया। रास्ता बंद होते ही पुलिस ने रूट को डायवर्ट कर दिया तथा चौक से पहले बैरिकेड लगा दिए। हालांकि पिपली की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन बेरोक टोक चलते रहे।
सुबह साढ़े 10 बजे राजस्व विभाग ने अदालत के आदेश पर पैमाइश की तो प्लॉट की जमीन में आधा केडीबी रोड आ गया। रोड के बंद होते शहर की ओर जाने वाले वाहनों को अन्य रास्तों से निकाला गया। इससे वाहन चालकों को परेशान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं इस रोड के बंद होने से आसपास के लोगों को भी परेशानी होगी। उनको चौक के ऊपर से घूम कर आना-जाना होगा। रात आठ बजे तक प्रशासन की ओर से इस सड़क को खुलवाने के लिए किसी कार्रवाई नहीं की गई।
दरअसल, अदालत के आदेश पर सुबह साढ़े 10 बजे तहसीलदार नवनीत, कानूनगो प्रवीण कुमार, पटवारी संजय कुमार व एचएसवीपी के जेई ने भूमि मालिक कांशीराम के लिए सर्किट हाउस चौक पर पैमाइश की। इस पैमाइश में 100 फुटा रोड की 22 गुना 99 फीट यानि 242 वर्ग गज की जमीन कांशीराम के हिस्से में आ गई। जमीन की पैमाइश होते ही जेसीबी ने सड़क के किनारों पर खोदाई शुरू कर दी। पांच घंटे की कार्रवाई के दौरान शहर थाना पुलिस प्रभारी सीमा, सेक्टर सात पुलिस चौकी प्रभारी जयकरण पुलिस बल के साथ मौजूद रहे। कब्जे के दौरान अदालत के कर्मचारी भी मौके पर ही मौजूद थे। कांशीराम को कब्जा मिलने के बाद इन कर्मचारियों ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दी।
कांशीराम ने बताया कि अदालत ने कब्जा लेने के लिए 11 अप्रैल की तिथि मुकर्रर की थी, मगर उस तारीख पर प्रशासन ने टालमटोल करके कब्जा नहीं दिलाया था। इस पर सुनवाई करते हुए 25 अप्रैल को अदालत ने जिला प्रशासन को कब्जा दिलाने के आदेश दिए थे। प्रशासन की ओर से कब्जा न दिलाने पर अदालत ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश भी जारी किया था। उसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में उसे जमीन पर कब्जा दिलाया।
कांशीराम ने बताया कि पिछले साल दो अप्रैल को उसने अदालत के आदेश पर सड़क के बीच में मिट्टी डालकर कब्जा करने का प्रयास किया था। तब पुलिस ने उसके खिलाफ ही मामला दर्ज किया था। उस कार्रवाई के बाद अदालत ने कई बार प्रशासन को कब्जे के आदेश दिए थे। चार महीने पहले भी प्रशासन ने बरसात होने का बहाना करके कब्जा नहीं दिलाया था।
यह है मामला
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने साल 2002 में सेक्टर के लिए जमीन अधिग्रहण की थी। तब कांशीराम व अन्य ने 22 गुना 99 फीट के प्लॉट पर अपना हक जताया था। हाईकोर्ट ने उक्त जमीन उनको रिलीज कर दी थी। प्रशासन ने एडिशनल सिविल जज पूजा सिंगला के आदेशों का पालन करते हुए डीआरओ चांदीराम और एचएसवीपी के ईओ योगेश रंगा को इसके लिए अधिकृत किया था। अधिकारियों को कब्जा दिलवाने के बाद पांच अप्रैल 2021 तक कोर्ट में जवाब देना था। कांशीराम और अन्य ने कहा कि जमीन पर उनका हक है। इसे लेकर कई बार समझौते भी हो चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अपना हक नहीं मिला।
कांशीराम ने बदले में मांगी थी जमीन
कांशीराम ने बताया कि उसने शहरवासियों की सुविधा को देखते हुए एचएसवीपी से इस जमीन के बदले में दर्राकलां में जमीन मांगी थी, लेकिन अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए थे। उसके बाद उसने अदालत से कब्जा दिलाने की याचिका दायर की थी। अब भी अगर एचएसवीपी उनके साथ समझौता करना चाहे तो वह उसके लिए भी तैयार है।
आला अधिकारियों से चल रही बातचीत
एचएसवीपी के ईओ दीपक कुमार ने बताया इस मामले को लेकर आला अधिकारियों से बातचीत चल रही है। इस रोड पर कई अन्य लोगों के केस भी अदालत में विचाराधीन है। अगर एक बार में ही प्रतिबंध दूर होंगे तो विभाग को फायदा होगा। लोगों को कोई समस्या न हो इसके लिए बातचीत चल रही है।
रोड बंद होने के बाद डायवर्ट किया गया शहर की ओर जाने वाला ट्रैफिक। संवाद- फोटो : Kurukshetra
मामले की जानकारी देते भूमि मालिक कांशीराम व अन्य। संवाद- फोटो : Kurukshetra
वीआईपी रोड पर जेसीबी से उखाड़ा गया रास्ता। संवाद- फोटो : Kurukshetra