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इस बार राइस मिलों से 50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल लेगा एफसीआई

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कस्टम मिल्ड राइस यानी सीएमआर का कार्य करने वाले राइस मिलर्स को इस बार कुल चावल का 50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल देना होगा। भारतीय खाद्य निगम की एक दिवसीय कार्यशाला में वीरवार को उप महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) प्रदीप सिंह ने अनाज मंडियों में लाई जाने वाली फसल का किसानों के खातों में समयबद्ध भुगतान करने पर जोर दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि एफसीआई ने सीएमआर नीति तय कर दी है। हरियाणा राज्य को 40 लाख टन सीएमआर का लक्ष्य दिया गया है, इसमें 20 लाख टन फोर्टिफाइड चावल लिया जाएगा।
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भारतीय खाद्य निगम के करनाल स्थित मंडल कार्यालय में वीरवार को खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 के लिए धान खरीद और चावल अधिप्राप्ति विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें उप महाप्रबंधक प्रदीप सिंह ने अध्यक्षता करते हुए एफसीआई करनाल व फरीदाबाद के अधिकारियों से कहा कि भारत सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अनुसार मंडियों में लाई गई उनकी उपज के लिए किसानों को सीधे उनके खातों में त्वरित भुगतान किया जा रहा है। खरीदे गए धान के त्वरित उठान सुनिश्चित करने को भी कहा।
उप महाप्रबंधक ने कहा कि हरियाणा को 40 लाख टन अपेक्षित कस्टम मिल्ड चावल (सीएमआर) का लक्ष्य दिया गया है। जिसमें से 20 लाख टन फोर्टिफाइड चावल का लक्ष्य दिया गया है। अर्थात जो भी राइस मिलर धान के बदले जितना भी सीएमआर देगा, उसका 50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल देना होगा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा देश में खरीफ 2021-22 के तहत 200 लाख टन फोर्टिफाइड चावल की खरीद का लक्ष्य रखा है। भारत सरकार के नए आदेशों के अनुसार वर्तमान खरीफ सीजन में सीएमआर के प्रस्तावित लॉट की अंतिम स्वीकृति से पहले लॉट का मिक्सड इंडीकेटर मैथड से परीक्षण किया जाएगा। जिसमें पुराना चावल स्वीकार्य नहीं होगा। इस मैथड से यह स्पष्ट हो जाएगा कि चावल कितना पुराना है। पुराना चावल रिजेक्ट कर दिया जाएगा। सहायक महाप्रबंधक (गुणवत्ता नियंत्रण) विनोद कुमार मीना ने चावल प्राप्ति कि प्रक्रिया से संबंधित सभी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। संचालन मंडल प्रबंधक ने किया। इसमें एफसीआई करनाल व फरीदाबाद के अधिकारी/ कर्मचारी शामिल रहे।
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50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल से मिलर्स को लगेगा झटका
-भारत सरकार के 50 प्रतिशत फोर्टिफाइड चावल लेने के निर्णय से राइस मिलर्स को करारा झटका लगेगा। क्योंकि पिछले साल तो सिर्फ 10 प्रतिशत फोर्टिपाइड चावल देने को कहा गया था, तो भी राइस मिलर्स ने हाथ खड़े कर दिए थे। हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कुमार गोयल ने बताया कि फोर्टिफाइड चावल के लिए मशीनें नहीं हैं। फोर्टिफाइड चावल यदि सरकार उपलब्ध कराते हैं तो मिक्स करके देने में मिलर्स को कोई परेशानी नहीं है। यदि सरकार नहीं देती तो राइस मिलर्स को कहे कि वह खरीदें, क्योंकि कीमत तो सरकार को ही देनी है। लेकिन 50 प्रतिशत बहुत है, इसे सीमित किया जाना चाहिए। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एसीएस से मिलकर बात रखी है।
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