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औद्योगिक क्षेत्र से करोड़ों के पेड़ काटने का अनुमान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। गांव बेगमपुर स्थित एचएसआईआईडीसी में सफाई व ट्रिमिंग के नाम पर हजारों पेड़ काटने के मामले की जांच करने के लिए पानीपत व करनाल वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी। टीम ने जांच के बाद बताया कि एक पेड़ की कीमत करीब पांच हजार रुपये है।
इससे ठेकेदार द्वारा एचएसआईआईडीसी के कर्मचारी व अधिकारियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये के पेड़ों को काटकर बेचने का अनुमान है, क्योंकि इन पेड़ों की कटाई करीब एक महीने से चल रही थी। हर रोज एक ट्राली पेड़ों के तने से भरकर यहां से निकलती थी। इस मामले के उजागर होने पर एचएसआईआईडीसी के अधिकारी चुप्पी साधे हैं। एचएसआईआईडीसी के अधीन 987 एकड़ भूमि है। इसमें से करीब 100 एकड़ भूमि से पेड़ काटे गए हैं।
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डीसी को पत्र लिखकर कराएंगे जांच
पर्यावरण सरंक्षण समिति के अध्यक्ष एसडी अरोड़ा ने कहा कि बिना परमिशन के पेड़ काटना अपराध है। चाहे वह किसी ने भी काटे हों। इस बारे में वह डीसी निशांत यादव से मिलेंगे। यदि बेगमपुर एचएसआईआईडीसी का क्षेत्र पानीपत में आता है तो वह पानीपत डीसी से पत्र लिखकर मामले की गहनता से जांच कराने की मांग करेंगे।
बेगमपुर में टीम को भेजा गया था। यह मामला वन विभाग के अधीन नहीं है। जिला प्रशासन ही इस मामले में कार्रवाई करेगा। यदि उन्हें जिला प्रशासन की ओर से आदेश आते हैं तो वह गहनता से जांच करेंगे।
नरेश रंगा, डीएफओ, करनाल
डीएफओ ने सौंपी जांच रिपोर्ट, कर्मचारी-अधिकारी की मिलीभगत उजागर
वन विभाग के प्रदेश मुख्यालय से होगी आगामी कार्रवाई
कुंजपुरा। बड़ा गांव में जंगल में बिना अनुमति के पेड़ काटने के मामले में झज्जर के डीएफओ विपिन कुमार सिंह ने जांच रिपोर्ट रोहतक परिमंडल के चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट( सीसीएफ) एमएल राजवंशी (आईएफएस) को सौंप दी है। पता चला है कि जांच के दौरान पाया गया है कि फील्ड में तैनात वन विभाग के कर्मचारी और अधिकारी की मिलीभगत से ही बिना परमिशन के पेड़ काटे गए।
कुछ बाहरी लोगों और वन विभाग के कर्मचारियों के बीच गठजोड़ के चलते ही यह सब संभव हो सका। मामले में फॉरेस्ट गार्ड मुकेश कुमार, वन दरोगा दलबीर सिंह के अलावा रेंज अफसर सुभाषचंद को भी जिम्मेदार माना जा रहा है। वन दरोगा दलबीर सिंह और फॉरेस्ट गार्ड मुकेश कुमार पहले ही निलंबित किए जा चुके हैं जबकि सुभाष चंद के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है।
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दूसरी ओर रेंज अफसर सुभाष चंद इस मामले में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार कर रहे हैं। चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (सीसीएफ) एमएल राजवंशी आईएफएस का कहना है कि झज्जर के डीएफओ विपिन कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई जांच रिपोर्ट उन्हें मिल चुकी है। रिपोर्ट वन विभाग के मुख्यालय पंचकूला भेज दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही वन विभाग के प्रदेश मुख्यालय से आगामी कार्रवाई की जाएगी। खुद-बुर्द किए गए पेड़ों की अभी तक रिकवरी नहीं हो पाई है। इन पेड़ों को बरामद करने के लिए वन विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रयास किए जा रहे हैं।
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