बेमौसम बारिश से पहले ही किसानों को भारी नुकसान हो चुका है। धान के साथ ही सब्जियों की फसल पर भी असर पड़ा हैं। अब जबकि मंडियों में लाखों क्विंटल धान खुले में पड़ा है। ऐसे में एक बार फिर बारिश की संभावनाओं ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी हैं। किसानों के अनुसार धान की 30 प्रतिशत फसल खराब हो चुकी है।
अगर बारिश हुई तो आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच जाएगा। वहीं धान के साथ ही पालक, धनिया, चुकंदर, गोभी, लहसुन, आलू सहित सब्जी की अन्य फसलें भी प्रभावित होंगी। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. गिरीश नागपाल के अनुसार मंडियों में जो धान खुले में पड़ा है या खेतों में खड़ा है, उसके लिए तो बारिश अच्छी नहीं है। जहां धान कट चुका है और गेहूं, सरसों, जौं और चना की बिजाई की तैयारी है, उसके लिए थोड़ी बारिश अच्छी है।
मौसम के पूर्वानुमान से करें गेहूं की बिजाई
गेहूं की बिजाई शुरू हो चुकी है। अगेती किस्मों की 25 अक्तूबर से 5 नवंबर तक, मध्यम किस्मों की 5 नवंबर से 25 नवंबर तक तथा पछेती किस्मों की 25 नवंबर से 25 दिसंबर तक बिजाई करने का उपयुक्त समय है। किसानों से अपील है कि मौसम के पूर्वानुमान के साथ ही कृषि कार्य करें। जिन दिनों में मौसम खराब होने की संभावना हो उस समय बिजाई न करें। अन्यथा दोबारा बिजाई करनी पड़ेगी। - डॉ. अनुज कुमार, प्रधान वैज्ञानिक, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान।
फसल कटाई में देरी होना बड़ा नुकसान
मौसम खराब होने से धान की कटाई में देरी होना बड़ा नुकसान है। वर्षा के साथ तेज हवा चलने से फसल गिरने की आशंका बनती है। सरसों की 60 से 70 प्रतिशत तक बिजाई हो चुकी है। इस फसल पर वर्षा का नुकसान नहीं होगा। यदि ज्यादा बारिश होती है तो गेहूं बिजाई में भी देरी होगी। वर्षा कम रहती है तो गेहूं बिजाई समय पर हो जाएगी। - डॉ. एसके ककरालिया, अनुसंधान वैज्ञानिक, अंतरराष्ट्रीय मक्का एवं गेहूं सुधार केंद्र मैक्सिको।