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चक्रव्यूह में फंसकर कराह रहा अन्नदाता

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लचर सरकारी सिस्टम और राइस मिलर्स तथा आढ़तियों के चक्रव्यूह में फंसे किसानों की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। अनाज मंडियों में कई-कई दिनों से धान लेकर बैठे किसान खरीदारों का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन किसानों के हितैषी होने का दम भरने वाले खरीदार ही खरीद में देरी करके किसानों की चिंता बढ़ा रहे हैं। खरीद एजेंसियां भी पस्त हैं। खरीद शुरू हुए एक पखवाड़ा बीत चुका है, इसके बावजूद किसानों का धान नहीं बिक रहा है, जिनका बिका भी उनका भुगतान एक रुपये का नहीं हुआ है। फिलहाल किसानों को चिंता भुगतान की नहीं बल्कि ट्रालियों में भरे व मंडियों में पड़े धान को शीघ्रता से बेचने की है। क्योंकि जैसे जैसे समय बीत रहा है, वैसे वैसे धान खराब होने की आशंका बढ़ रही है। आखिरकार किसानों को धान को औने पौने दामों पर बेचने को विवश होना पड़ रहा है। यही कारण है कि पिछले चौबीस घंटे में पीआर प्रजाति के धान के भाव में भी 50 से 170 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आ गई है।
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पोर्टल को अनाज मंडियों से लेकर हरियाणा सरकार ने अपने नियंत्रण में ले तो लिया लेकिन व्यवस्था सुधरने की बजाय चरमरा गई है। मार्केट कमेटी सचिव के कार्यालय में सुबह से लेकर देर रात किसानों की भीड़ लग रही है, जिनकी यही शिकायत है कि रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद फोन नंबर पर उनका नाम, रकबा शो नहीं होने के कारण गेटपास नहीं मिल पा रहा है। अब धान किराये की ट्रालियों में भरा हैं, इसे कहां ले जाएं। चौबीस घंटे भी ट्रालियों में भरा रहा तो खराब हो सकता है। मंडी सचिव सिर्फ प्रार्थना पत्र लेकर सुधार के लिए ई-मेल करने तक सीमित हैं।
मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल बंद है
-जब सरकार ने यह तय कर दिया कि बिना फसल रजिस्ट्रेशन के धान नहीं खरीदा जाएगा तो 30 सितंबर के बाद आखिरकार मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल क्यों बंद कर दिया गया। जबकि सिर्फ 70 प्रतिशत फसल का ही रजिस्ट्रेशन कराया जा सका है। इसके बावजूद पोर्टल बंद है। हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने भी उपायुक्त से पोर्टल को खुलवाने की मांग की है।
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अब तक एक रुपया भी नहीं मिला भुगतान
-धान की खरीद 26 सितंबर से ही शुरू कर दी गई थी। अब तो रोजाना लाखों क्विंटल हो रही है, लेकिन अभी तक आढ़तियों को धान का भुगतान नहीं किया गया है, इसलिए किसानों को भी भुगतान नहीं दिया जा सका है, जबकि सरकार दावा कर रही थी कि 72 घंटे में किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा। आखिर सरकार की यह कैसी खरीद व्यवस्था है। तत्काल दुरुस्त नहीं किया गया तो आढ़तियों व किसानों को भारी नुकसान पहुंचेगा। आढ़तियों व किसान को विलंबित समय के ब्याज सहित भुगतान किया जाना चाहिए।
-रजनीश चौधरी, चेयरमैन-हरियाणा अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन। (फोटो-107)
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चौबीस घंटे में घट गया धान का भाव
-पीआर 126 प्रजाति के धान को लेकर वीरवार को आया था, लेकिन जब से मंडी में ढेर लगा है, कोई खरीदार ही नहीं आ रहा है, आज दो लोग आए, जिन्होंने 1850 रुपये क्विंटल का भाव लगाया। जबकि वीरवार की सुबह को ही इस धान का भाव 2020 रुपये क्विंटल था। आज 170 रुपये प्रति क्विंटल घाटे में बेचने को कह रहे हैं, इसलिए अभी तक नहीं बेचा है, कल तक देखते हैं, नहीं तो बेचना ही पड़ेगा, अन्यथा खराब हो जाएगा।
-मोहम्मद इस्लाम, ग्राम मंसूरा (शामली), यूपी। (फोटो-102)
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-अपनी ही फसल को मिट्टी के मोल बिकते देख बहुत दुख हो रहा है, तीन दिन हो गए, धान खराब होने की स्थिति में पहुंच चुका है लेकिन राइस मिलर्स कल 1800 का भाव लगा रहे थे, आज 1700 में लेने को कह रहे हैं। जबकि 50 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन ठेके पर लेकर जीरी पैदा की है, इससे तो लागत भी नहीं निकलेगी। आढ़तियों से ब्याज पर पैसा ले रखा है, उसे ही बेचना भी मजबूरी है। कम से कम सरकार को एमएसपी पर तो खरीद करनी चाहिए।
-राजपाल, किसान ग्राम गंगसीना। (फोटो-103)
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-मैने रजिस्ट्रेशन तो पहले ही करा दिया था, आज जब धान लेकर मंडी में आया तो गेटपास ही नहीं कट पाया है, कहा गया कि उसके मोबाइल नंबर से उसका रकबा शो नहीं हो रहा है। मार्केट कमेटी सचिव के पास आया हूं, एक प्रार्थना पत्र लिखकर दे दिया है, लेकिन कब तक सही हो जाएगा, यह भरोसा भी नहीं दिया गया है। बताते हैं कि इसमें सुधार भी चंडीगढ़ से ही होगा। ऐसे सैकड़ो किसान हैं, जो इन दिक्कतों से जूझ रहे हैं।
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-राकेश कुमार, किसान नगला मेघा। (फोटो-105)
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फोटो कैफ्शन-101-मार्केट कमेटी करनाल कार्यालय में सचिव को पोर्टल गड़बड़ी का शिकायती पत्र देते किसान।
104-अनाज मंडी करनाल में धान की लगी ढेरियां।
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