करनाल में कचरे के ढ़ेर में पड़े आयुष्मान कार्ड भी सील पैक हैं। कचरे के ढेर में आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
करनाल जिला सचिवालय की दूसरी मंजिल पर हजारों की संख्या में आयुष्मान कार्ड कचरे के ढेर में मिले हैं। इससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना शुरू हो गया है। क्योंकि लोगों को आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए काफी चक्कर काटने पड़ते हैं। जब कार्ड बन जाता है तो भी कई बार लाभार्थी को समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे में सवाल खड़े होना लाजमी है। इधर, एडीसी डॉ. वैशाली शर्मा का कहना है कि कार्डों का कचरे के ढ़ेर तक पहुंचना संदेहजनक है। मामले की जांच कराई जाएगी।
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आयुष्मान कार्ड को लेकर सरकार कर रही प्रचार प्रसार
कचरे के ढ़ेर में पड़े आयुष्मान कार्ड भी सील पैक हैं। कचरे के ढेर में आयुष्मान कार्ड मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आयुष्मान कार्ड को लेकर सरकार जितना ज्यादा प्रचार प्रसार कर रही है, उसको लेकर उतनी ही लापरवाही बरती गई। आयुष्मान कार्ड से संबंधित कार्यालय की जिम्मेदारी बनती है कि वे डाक या फिर किसी अन्य माध्यम से पात्र व्यक्ति तक आयुष्मान कार्ड पहुंचाए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।