करनाल। शहर के नागरिक अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है। यहां चिकित्सकों के कुल 74 पद स्वीकृत हैं लेकिन इनमें से 31 पद खाली हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों के इलाज की उम्मीद कैसे की जा सकती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अस्पताल में रोजाना 18 सौ के लगभग ओपीडी होती हैं। पर चिकित्सकों के अभाव में हर रोज सैकड़ों मरीजों को सुबह जल्दी आने के बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ तो नंबर न आने के चलते निजी अस्पतालोें में इलाज करवा जेब ढीली करवाने को मजबूर हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्टाफ नर्स और पेरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है। स्वास्थ्य विभाग कोरोना की तीसरी लहर से लड़ने के पुख्ता इंतजाम होने के दावे तो कर रहा है, पर बिना डाक्टरों और अन्य स्टाफ के तीसरी लहर पर काबू पाना इतना आसान नहीं होगा। संवाद
दो ही बाल रोग विशेषज्ञ, जरूरत 4 की
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोरोना की तीसरी लहर आने की संभावना जताई जा रही है। जिसमें बच्चों के संक्रमित होने की संभावना अधिक है। पर नागरिक अस्पताल मेें दो ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं व एक अनुबंध पर है। लेकिन जरूरत 4 की है। बिना विशेषज्ञ बच्चों को कोरोना की चपेट से बचा पाना बड़ी चुनौती होगी।
ये पद भी खाली
अस्पताल में एक ही डेंटल सर्जन है जबकि जरूरत तीन की है। एक पद क्लीनिकल सायकोलॉजिस्ट, डेंटल हाईजेनिस्ट, बॉयो मेडिकल इंजीनियर, क्वालिटी मैनेजर, कैशियर, केयरटेकर, सीनियर स्टेनोग्राफर, चालक की पोस्ट भी खाली हैं। नंदकिशोर, बिल्लू, राम कुमार, रोशनी व ओमवती का कहना है कि भीड़ होने के कारण अपना नंबर आने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। अगर डाक्टर अधिक होंगे तो जल्दी नंबर आएगा और इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
जब से अस्पताल दोबारा शुरू हुआ है, तभी से चिकित्सकों, स्टाफ नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ का अभाव है। इस बारे में विभाग को लिखित में सूचित किया गया है। तीसरी लहर की संभावना के चलते जल्द इस समस्या का निवारण होने की उम्मीद है।
-डॉ. पीयूष शर्मा, पीएमओ नागरिक अस्पताल