फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां चंद्रघंटा और मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना कर मांगी मुरादें

विज्ञापन
Worship Maa Chandraghanta and Maa Kushmanda and seek her wishes - फोटो : Kaithal
विज्ञापन
मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा व चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना श्रद्धालुओं ने बड़े ही श्रद्धा भाव से की और सुख समृद्धि की कामना की। वहीं छोटे बच्चों में भी मां के प्रति श्रद्धा दिखाई दी और उन्होंने मां की ज्योति जलाई। बड़ी देवी माता मंदिर के पुजारी शिवचरण ने बताया कि मां के माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है। इनका वाहन सिंह है और दस हाथ हैं। इनके चार हाथों में कमल फूल, धनुष, जप माला और तीर है। उन्होंने बताया कि ऐसी मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। शत्रुओं को डर सता रहा हो या फिर कुंडली में ग्रह दोष की समस्या हो। मां चंद्रघंटा की पूजा से ये सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं। हर तरह से डर को दूर कर व्यक्ति में आत्मव्िश्वास का संचार करती हैं। मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले व्यक्ति के चेहरे पर एक अलग ही तेज होता है और देवी मां के आशीर्वाद से सुंदर काया भी मिलती है। उन्होंने कहा कि आज देवी दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा अर्चना होगी।
विज्ञापन

शारदीय नवरात्र के चौथे ही दिन मंदिरों में मां कुष्मांडा की भी पूजा अर्चना की गई। सुबह से ही मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने नारियल चुनरी व श्रृंगार भेंट करके सुख समृद्धि की कामना की। सुबह की आरती में श्रद्धालुओं ने शिरकत करके मां के दर में हाजिरी लगाई। छोटी माता देवी मंदिर, बड़ी माता देवी मंदिर, श्री ग्यारह रुद्री मंदिर में सुबह 6 बजे ही श्रद्धालु पहुंचना आरंभ हो गए थे। श्रद्धालुओं ने दुर्गा स्वरूप मां की प्रतिमा पर पीले रंग के फूल चढ़ाकर पूजा अर्चना की और सुख समृद्धि की कामना की। कोठी गेट स्थित छोटी देवी मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इसी प्रकार में ग्यारह रुद्री मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालु लाइनों में लग कर महामाई के दर्शन करके मुरादें मांगी।
श्री छोटी देवी माता मंदिर के पुजारी विनायक भारद्वाज ने बताया कि इस समय नवरात्र पर्व चल रहे हैं। पर्व को लेकर लोगों में विशेष उत्साह है। नवरात्र पर्व पर यहां विशेष पूजा अर्चना की जाती है। जो भी भक्त यहां माथा टेककर मन्नत मांगता है उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्र पर सप्तमी व अष्टमी के दिन यहां मेला भी लगता है।
विज्ञापन

नवरात्र के तीसरे दिन देवी के तृतीय स्वरूप मां चंद्रघंटा व चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा की गई। स्वर्ग द्वार शिव मंदिर के महंत सुरेंद्र गिरी ने कहा कि मैया के सिर पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। इसी वजह से इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। देवी चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। इनकी 10 भुजाएं और 3 आंखें हैं। 8 हाथों में खड्ग, बाण इत्यादि दिव्य अस्त्र-शस्त्र हैं। दो हाथों से ये भक्तों को आशीष दे रही हैं। गिरी ने इसकी महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद आरती हुई। इस अवसर पर मास्टर रामनाथ, संगीत बंसल, सुरेंद्र सरदाना, सुरेश सरदाना राजू, सतीश सरदाना, अशोक गोयल, ओमप्रकाश रहेजा, कृष्ण वधवा, रामपाल बंसल, अमर मदान, राजकुमार रहेजा, मोहित बंसल, परवेश कुमार, शिल्पा, नीलम, ममता सरदाना, दीपिका सरदाना, शालिनी व अदिति मौजूद रहे।
राजौंद में पावन नवरात्रों के तीसरे दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां चंद्रघंटा की पूजा अर्चना की। श्रद्धालु प्रथम नवरात्र से ही मंदिरों में सुबह व सांय पूजा अर्चना के लिए भारी संख्या में पहुंच रहे हैं। नगर के दुर्गा मंदिर, मां भद्रकाली मंदिर व प्राचीन शिव मंदिर में पूरे नगर से श्रद्धालु पूजा के लिए पहुंचे हैं। आचार्य राम भगत हरितस ने बताया कि श्रद्धालुओं ने तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की पूजा की। उन्होंने बताया कि वैसे तो मंदिरों में पूजा अर्चना रोजाना होती है, परंतु नवरात्र के विशेष पर्व पर मंदिरों में पूजा का विशेष महत्व शास्त्रों में दर्शाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें