साल भर से जिले में सत्तापक्ष के कार्यक्रमों को लेकर एक तरह का अघोषित विराम लगा हुआ था। इस अवधि में जिले में विधायकों से लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल तक के कार्यक्रम रद्द करने पड़े। इससे पहले किसानों ने घोषणा की थी कि जब तक कृषि कानून वापस नहीं होते, तब तक जिले में किसी भी सत्ताधारी दल के नेता का सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं होने दिया जाएगा। गांव हो या शहर, इस घोषणा के बाद सभी के प्रस्तावित कार्यक्रमों का विरोध किया गया।
सबसे पहले गुहला से विधायक ईश्वर सिंह को एक धर्मशाला से किसानों के विरोध को देखते हुए कार्यक्रम को बीच में छोड़कर जाना पड़ा था। इसके बाद राज्यमंत्री कमेलश ढांडा के कलायत में एक कार्यक्रम से पहले काले झंडे दिखाए गए। इस मामले में पुलिस ने केस भी दर्ज किया था। इसके बाद सांसद नायब सैनी के लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में पहुंचने का विरोध किया गया। जिसमें पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष राजपाल तंवर की गाड़ी के विरोध को लेकर विवाद भी पैदा हो गया था। इसके बाद पिछले ही महीने मुख्यमंत्री मनोहर लाल को किसानों के संभावित विरोध को देखते हुए महाराजा अग्रसेन जयंती में पहुंचने के कार्यक्रम को माता मनसा देवी परिसर पंचकूला से बयान जारी कर रद्द करना पड़ा था। उप-मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के कार्यक्रम भी टलते रहे। भाजपा के नेता साल भर से एक तरह से सार्वजनिक कार्यक्रमों को न करने को मजबूर थे। सांसद नायब सैनी आते तो मीडिया को भी चंद मिनट पहले ही सूचना दी जाती थी। अब जब कृषि कानून वापसी का स्वयं पीएम नरेंद्र मोदी ने एलान कर दिया है तो भाजपा नेताओं के लिए एक तरह से राहत भरा फैसला रहेगा। वे कम से कम अपने हल्के में, शहर में सार्वजनिक कार्यक्रम, सभाएं, उद्घाटन, शिलान्यास जैसे कार्यक्रम बिना किसी विरोध के कर पाएंगे।
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प्रधानमंत्री जी ने बड़े हृदय से फैसला लेकर तीन कृषि कानूनों को वापस लिया है। जिसका हम सभी स्वागत करते हैं। भविष्य में भी इसी प्रकार से सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए इस देश को आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी कर रहे हैं देश के लिए कर रहे हैं। कृषि कानून भी देश के लिए थे और देश के लिए ही इन्हें वापस लिया गया है। यह स्वागत योग्य कदम है। सभी को इसका स्वागत करना चाहिए।
--अशोक गुर्जर ढांड, भाजपा जिला अध्यक्ष, कैथल।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि बिल वापस लेकर किसानों की बात मानी है। पीएम ने बड़ा दिल दिखाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि यह फैसला देशहित में लिया गया था। अब किसानों को ये कानून स्वीकार नहीं हैं तो उन्होंने इन्हें वापस लिया है। पीएम के इस फैसले का सभी को स्वागत करना चाहिए। किसानों को अपना आंदोलन खत्म कर घरों को लौट जाना चाहिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त करना चाहिए।
---लीला राम, विधायक, कैथल।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में केंद्र व प्रदेश सरकार किसानों के हक में काम कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि कृषि सुधार के लिए कानून लाए गए थे। किसानों को ये स्वीकार नहीं हैं तो इन्हें वापस लेने का एतिहासिक निर्णय लिया है। जिसका सभी को स्वागत करना चाहिए। हरियाणा कृषि प्रधान देश है। सरकार किसान कल्याण के लिए अनेकों योजनाओं पर काम कर रही है।
-- कमेलश ढांडा, राज्यमंत्री हरियाणा सरकार।
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एक बात स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए काम कर रहे हैं। उनकी मंशा पर कोई सवाल नहीं उठा सकता। इसीलिए प्रधानमंत्री ने किसानों की बात मानकर कृषि वापस लेने की घोषणा कर दी है। अब किसानों को भी अपना आंदोलन वापस लेना चाहिए।
--अरुण सर्राफ, पूर्व चेयरमैन हरियाणा सरकार।