यूक्रेन में हालात अब बदतर होते जा रहे हैं। बच्चे यूक्रेन से जैसे-तैसे रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं, जहां रिफ्यूजी कैंप में बर्फबारी, ठंड सहित अन्य दुश्वारियों के बीच भारतीय फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं। दो दिन पहले यूक्रेन के इवानो फ्रेंकविस्ट से बॉर्डर के लिए चले कैथल निवासी अंकित ने बताया कि वे किसी तरह से बस का प्रबंध करके रोमानिया के लिए चले थे।
दो दिन के सफर के बाद वे मुश्किल से रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंचे हैं, जहां बर्फबारी के बीच रिफ्यूजी कैंप में रह रहे हैं। यहां सैनिक लोगों को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायर भी कर रहे हैं। बच्चे डरे हुए हैं। अब उन्हें इस बात की चिंता है कि कब भारतीय फ्लाइट आएगी और कब वे भारत के लिए रवाना होंगे। उनके साथ चार अन्य भारतीय युवक भी हैं।
उधर, खारकीव में फंसी छात्रा काजल के परिजनों ने बताया कि अभी तक उनकी बेटी के पास कोई राहत नहीं पहुंची है। वहां भारी संख्या में बच्चे फंसे हुए हैं। बमबारी चल रही है। साथ ही रूस की सेना के टैंक व सैनिक सड़कों पर हैं। बच्चे बंकरों में कैद हैं। सोमवार को रूस व यूक्रेन की बातचीत से उम्मीद जगी है।
खराब होते हालात, बार्डर तक पहुंचना नहीं आसान
यूक्रेन में युद्ध में खराब होते हालात के बीच बार्डर तक पहुंचना आसान नहीं है। मुश्किलों को पार कर कुछ बच्चे तो बार्डर तक पहुंच गए, लेकिन अभी अधिकतर बच्चे परेशान हैं। परिजनों ने वहां के हालात बयां कर सरकार से फ्लाइट की संख्या बढ़ाने और जल्द से जल्द फंसे लोगों को वापस लाने की गुहार लगाई है।
बार्डर पार करना नहीं आसान, हालात हो रहे खराब
लवानो से अपने घर लौटी सुभाष नगर सलेमपुर निवासी शिवानी ने बताया कि यूक्रेन और रोमानिया के बॉर्डर को पार करना इस समय सबसे मुश्किल बना हुआ है। जैसे-तैसे इवानो से रोमानिया पहुंचने के बाद वह रविवार को रात नौ बजे फ्लाइट में बैठी थी। सोमवार को सुबह साढ़े छह बजे दिल्ली पहुंची। इस समय वहां हजारों की संख्या में विद्यार्थी फंसे हुए हैं, लेकिन उन्हें बॉर्डर पार करवाने के लिए बसें केवल तीन लगी हुई हैं। अब तो बहुत से विद्यार्थियों को एक-एक समय खाना जुटाने में भी दिक्कतें आ रही हैं। अगर जल्द वहां से नहीं निकले तो हालात और ज्यादा खराब हो सकते हैं।
कीव स्टेशन पर फंसे विद्यार्थी
सेक्टर 20 निवासी दलबीर सिंह ने बताया कि उनकी बेटी शिवानी एमबीबीएस में चौथे वर्ष की छात्रा है। वह खारकीव में शिक्षा ग्रहण कर रही है। आज ही उनसे बातचीत हुई है। शिवानी ने बताया कि उसके साथ कैथल के चार विद्यार्थी और हैं। वे रेलवे स्टेशन कीव पर हैं। यहां कहा गया था कि भारतीय विद्यार्थी किसी तरह रेलवे स्टेशन पर पहुंचें, लेकिन वहां पहुंचे तो ट्रेनों में एंट्री नहीं मिली। वे 15-15 किलोमीटर पैदल चलकर वहां पहुंचे हैं। अपना ठिकाना भी छोड़ दिया है और आगे भी कोई रास्ता नहीं मिल रहा।
चार दिन से कीव में था फंसा बेटा, अब बार्डर की ओर रवाना
सेक्टर-19 निवासी कुलदीप पूनिया ने बताया कि उनका बेटा अनुराग पूनिया चार दिन से कीव में फंसा हुआ था। अब बात हुई है, जिसमें अनुराग ने बताया कि वह अन्य भारतीयों के साथ सोमवार को बार्डर की ओर रवाना हुए हैं। एंबेसी की ओर से कहा जा रहा है कि वे किसी भी तरह से यहां से निकल जाएं। खाने-पीने और अन्य प्रकार की दिक्कतें अब भी पहले की तरह बनी हुई हैं। काफी विद्यार्थियों के पास तो खर्च की राशि भी पूरी नहीं है। न ही एटीएम से निकलवा पा रहे हैं।