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सेवानिवृत्त चिकित्सक दंपती पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश

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जिला स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके चिकित्सक दंपती के खिलाफ 18 साल पहले जजों के फर्जी हस्ताक्षर करने के आरोप में न्यायालय ने पुलिस को केस दर्ज करने के आदेश जारी किए हैं।
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आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल रसूलपुर ने बताया कि वर्ष 2003 में डॉ. नीलम कक्कड़ और उनके पति डॉ. बीबी कक्कड़ का तबादला गुड़गांव हो गया था, लेकिन दोनों ने वहां ज्वाइन न करके उस समय कैथल कोर्ट और गुहला कोर्ट में केस से संबंधित गवाही दिखाते रहे और अपनी ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। इतना ही नहीं डॉक्टर दंपती ने जजों के फर्जी हस्ताक्षर से उपस्थिति प्रमाणपत्र बना कर गलत तरीके से टीएडीए भी लिया। जबकि जिन न्यायालयों का हाजिरी रिकॉर्ड दिखाया गया, उन न्यायालयों के चार जजों ने स्पष्ट कर दिया कि दोनों डॉक्टर उनकी अदालत में पेश नहीं हुए। न ही उनकी कोर्ट में ऐसा कोई केस लंबित है। जजों ने खुद विभाग को कार्रवाई के लिए लिखा था, लेकिन आज तक भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
जयपाल ने बताया कि उसे दिसंबर 2020 में इस बात की जानकारी लगी। उसने आरटीआई के तहत दस्तावेज एकत्रित किए और इसकी शिकायत कैथल के सत्र न्यायालय, एसपी कैथल व सीएम विंडो में शिकायत दी थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जिला सत्र न्यायाधीश कैथल ने इस शिकायत को कार्रवाई के लिए महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं हरियाणा को भेज दिया था, वहीं दूसरी तरफ कैथल पुलिस द्वारा कोई आज तक कोई भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी और शिकायत निराधार मानते हुए दफ्तर दाखिल कर दिया गया था। उसके बाद जयपाल ने डॉक्टरों पर रिपोर्ट दर्ज करवाने व उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए धारा 156 (3) के तहत याचिका दायर की। जिसमें न्यायालय ने उसकी शिकायत को सही मानते हुए आरोपी दंपत्ति के खिलाफ जजों के फर्जी साइन करने के मामले में रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश जारी किया है।
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