कैथल। दो नाबालिग छात्राओं से दुष्कर्म के दोषी गुरुद्वारे के ग्रंथी को न्यायालय ने 25 साल की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा है कि समाज में जिस पद पर दोषी है, उसे देखते हुए यह सजा जरूरी थी, ताकि दूसरे लोगों को इससे सबक मिल सके। महिला विरुद्ध अपराध की स्पेशल न्यायालय की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूनम सुनेजा ने उक्त सजा सुनाई है।
बता दें कि 50 वर्षीय आरोपी जसवीर सिंह चीका थाना क्षेत्र के एक गांव में स्थित गुरुद्वारे का ग्रंथी था, जहां एक संस्था की तरफ से बच्चों को पढ़ाया जाता था। उसी गांव की नौ और दस वर्षीय छात्राएं भी वहां पढ़ने जाती थीं। चार फरवरी 2019 को गुरुद्वारे में ही जसवीर सिंह ने दोनों छात्राओं से दुष्कर्म किया। नाबालिग छात्राओं की ओर से इसकी जानकारी परिजनों को दी गई, जिसके बाद शिकायत के आधार पर छह फरवरी 2019 को आरोपी के विरुद्ध चीका थाने में पुलिस ने केस दर्ज किया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की कोर्ट में सुनवाई के बाद शुक्रवार को स्पेशल न्यायालय की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पूनम सुनेजा की अदालत ने फैसला सुनाया। इसमें गुरुद्वारे के ग्रंथी जसवीर सिंह को दोषी करार दिया गया और 25 साल के कारावास तथा एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।
पांच लोगों की हुई गवाही, 48 पन्नों का आया फैसला
नाबालिग छात्राओं से दुष्कर्म मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट में पांच लोगों की गवाही हुई, जिसके आधार पर ग्रंथी जसवीर सिंह को दोषी पाया गया। इस संबंध में कोर्ट ने 48 पन्नों का फैसला लिखा है। जिला उप न्यायवादी जयभगवान गोयल ने बताया कि न्यायाधीश ने सभी कानूनों को ध्यान में रखते हुए सबूतों के साथ यह फैसला सुनाया है।
पीड़ितों को साढ़े पांच-पांच लाख देने के निर्देश
नाबालिग से दुष्कर्म मामले में कोर्ट ने जहां दोषी को कठोर सजा सुनाई है। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़ित छात्राओं के परिजनों को साढ़े पांच-पांच लाख की आर्थिक मदद करने के निर्देश दिए हैं।