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50 लाख 30 हजार 100 रुपये की लागत से जिले के 23 स्कूलों में लगाए जाएंगे रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, विभाग ने शुरू किया कार्य

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10-कैथल। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय। - फोटो : Kaithal
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कैथल। बरसात के मौसम में जलभराव की समस्या से जूझने वाले राजकीय स्कूलों को अब जल्द ही इस परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा। शिक्षा विभाग की ओर से जिले के 23 राजकीय स्कूलों में 5030100 रुपये की लागत से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। विभाग के मुख्यालय की ओर से सिस्टम लगाने के लिए जिले को बजट जारी कर दिया है।
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स्कूलों में ये सिस्टम लगने से परिसर में जलभराव की समस्या से छुटकारा मिलेगा। इसके अलावा बरसाती पानी का संरक्षण भी किया जा सकेगा। हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से बरसात का पानी वापस जमीन में भेजा जा सकेगा। इन स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए विभाग ने 5030100 रुपये खर्च करने की योजना तैयार की है। चयनित स्कूलों में से प्रत्येक स्कूल में सिस्टम लगाने के लिए विभाग की ओर से 218700 रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यालय के निर्देश अनुसार स्थानीय अधिकारियों ने स्कूलों की सूची भी तैयार कर ली है। हालांकि कुछ स्कूलों में सिस्टम लगाने का कार्य शुरू भी हो चुका है, लेकिन कइयों में अभी काम शुरू नहीं हो पाया है।
इन स्कूलों को सिस्टम लगाने के लिए किया गया है चयनित -
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए गुहला ब्लॉक से जीपीएस चीका व जीपीएस धर्मपुरा, सीवन क्षेत्र से जीपीएस सीवन, जीपीएस हरिजन बस्ती सीवन, कैथल ब्लॉक से जीपीएस कठवाड़, चंदाना, प्यौदा, पाडला, काकौत, मानस व सेक्टर-19 स्थित स्कूल को चयनित किया गया है। कलायत व राजौंद क्षेत्र से जीजीपीएस बड़सिकरी कलां, राजौंद, सेरधा, खरक और जीपीएस कमालपुर, कोटड़ा, कसान व खरक के नाम शामिल हैं। इनके अलावा पूंडरी व ढांड क्षेत्र से जीजीपीएस फतेहपुर, हाबड़ी, पाई और जीपीएस हाबड़ी का नाम शामिल है।
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बरसात के मौसम में बच्चों को स्कूल आने-जाने में भी होती हैं दिक्कतें
बरसात के मौसम में स्कूल परिसर में पानी जमा होने के कारण विद्यार्थियों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कुछ स्कूल तो ऐसे हैं, जिनमें पानी जमा होने के कारण स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो जाती है कि बच्चे स्कूल में आने से बचते हैं। अब सिस्टम लगाने से जल संरक्षण के साथ-साथ बच्चों को भी समस्या से छुटकारा मिलेगा। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल शर्मा ने बताया कि विभाग जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि सिस्टम लगाने का कार्य जारी है, लेकिन जहां अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया, वहां जल्द से जल्द यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इससे बच्चों की समस्या का समाधान होने के साथ-साथ पानी बचाने में भी सहायता मिलेगी।
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