फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोगों को सेवा का अधिकार देने में पिछड़ रहा जिला, प्रदेश में अंतिम पायदान पर

विज्ञापन
अधिनियम के बारे में जानकारी देते सीटीएम दर्शन सिंह यादव। संवाद - फोटो : Jind
विज्ञापन
हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत वीरवार को जिला प्रशासन द्वारा सीआरएसयू में सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें सीटीएम दर्शन सिंह यादव ने ऑनलाइन सेवाओं का लाभ लोगों को देने पर रिपोर्ट पेश की।
विज्ञापन

रिपोर्ट में दिखाया गया कि कि जींद जिला इस मामले में सबसे पिछड़ा है। नीचे से दूसरे यानी 21वें स्थान पर जींद आता है। जिले में करीब 20 हजार ऐसे आवेदन हैं, जिन पर पिछले दो साल से अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इस दौरान डीसी नरेश नरवाल ने कहा कि जिले में सबसे बुरा हाल पेंशन विभाग का है। पेंशन के लिए उनके पास प्रतिदिन 300 से 400 विधवा और दिव्यांग आते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत समय पर काम नहीं करने वाले अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
इस दौरान सीटीएम दर्शन सिंह यादव ने कहा कि विभिन्न विभागों में प्रदेश सरकार द्वारा 546 योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें से 276 योजनाओं को ऑनलाइन किया गया है। इन योजनाओं के लिए लोग सरल केंद्र व सीएचसी से आवेदन कर सकते हैं। धीरे-धीरे सभी योजनाओं को ऑनलाइन किया जाना है। ऐसे में अधिकारी अपने विभाग की तैयारी रखें। जैसे ही योजना ऑनलाइन हो, इस पर काम शुरू हो जाना चाहिए। इस दौरान नाटक व रागिनी के माध्यम से सेवा का अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी दी गई।
विज्ञापन

सीटीएम दर्शन ने कहा कि अब स्वयंसेवी संगठनों व प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा। अधिनियम में हर काम के लिए समय तय किया गया है। यदि उस तय समय में काम नहीं होता तो इसके लिए अधिकारी को अपील की जा सकती है। अंत में प्रदेश स्तरीय आयोग इसकी सुनवाई करेगा। जो अधिकारी पर कार्रवाई कर सकता है।
पिछले कुछ सालों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में आई कमी
डीसी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली में कमी आई है। इसके चलते लोगों में सरकारी विभागों व कर्मचारियों के प्रति एक सोच बन गई है। यहां लोगों के चक्कर कटवाए जाते हैं। डीसी ने कहा कि पहले मुख्यमंत्री गांवों में जाकर जनता दरबार लगाते थे। इससे लोगों की समस्याओं का समाधान ग्रामीण स्तर पर ही होता था। सेवाएं ऑलाइन होने से फिर से ऐसी ही स्थिति बनेगी कि लोगों को कागज उठाकर अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
पांच से 20 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान
डीसी ने कहा कि यह अधिनियम-2014 में लागू कर दिया था। लेकिन इस पर अभी सही प्रकार से काम नहीं हुआ है। ऐसे में अब इसे धरातल पर उतारा जा रहा है। इसके तहत अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी सेवाओं व योजनाओं का लाभ जनता को निर्धारित समय में उपलब्ध करवाना होगा। ऐसा नहीं करने वाले अधिकारियों पर पांच से 20 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
डीसी बोले, कुछ अधिकारी भागेंगे वीआरएस के लिए
डीसी ने कहा कि अधिनियम के तहत जुर्माने के साथ-साथ अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। ऐसे में वे अधिकारी, जिनका कार्यकाल कम बचा हुआ है, वे स्वैच्छिक सेवानिवृत्त की ओर भागेंगे। जो अधिकारी समय पर काम नहीं करेंगे वे वेतन को जुर्माने के रूप में ही भर देंगे।

सेमिनार में मौजूद अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के लोग। संवाद- फोटो : Jind

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें