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ट्रांसपोर्टर्स पर मानमानी का आरोप लगा धान खरीदारों ने की हड़ताल

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मंडी में पहुंचा धान। - फोटो : Jind
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ट्रांसपोर्टर्स द्वारा किराया बढ़ाने व बाहर भेजे जाने वाले धान की सुरक्षा की गारंटी नहीं देने के आरोप लगाते हुए खरीददारों ने जींद अनाज मंडी में हड़ताल शुरू कर दी है। इसको लेकर मंडी में खरीददार एसोसिएशन की मीटिंग महावीर कंप्यूटर की अध्यक्षता में हुई। इन लोगों ने कहा कि मनमर्जी से किराया लेने के बावजूद ट्रांसपोर्टर्स उन्हें धान की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे रहे हैं।
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महावीर कंप्यूटर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गाड़ी वालों की वजह से धान के उठान में समस्या आ रही है। इसको देखते हुए खरीदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल रहेगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स बाहर की गाड़ियों को माल लोड करने से रोक रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है। आसपास की मंडियों में काम सुचारु रूप से हो रहा है, लेकिन जींद मंडी में गाड़ी वाले अपनी मनमानी कर रहे हैं। वहीं अन्य मंडियों के मुकाबले जींद ट्रांसपोर्टर्स आठ प्रतिशत अधिक किराया ले रहे हैं। खरीददारों का कहना है कि प्रशासन ने बीच में आकर विवाद खत्म करना चाहिए।
खरीददार खरीद में सहयोग करने के लिए तैयार हैं, लेकिन ट्रक ट्रांसपोर्ट यूनियन बनाने के चक्कर में आपस में झगड़ा कर रहे हैं। जब तक गाड़ियों की समस्या का समाधान नहीं होता तब तक अनिश्चतकालीन हड़ताल रहेगी। गी। इस अवसर दिलबाग सिंह, राजकुमार मित्तल, प्रदीप गर्ग, प्रेम गोयल, जगमोहन यादव, ईश्वर मंगला, रणबीर शर्मा, महाबीर मित्तल, अनिल रेढू, अमित गर्ग, सुलतान सिंह, बजरंग, विरेंद्र मोर, प्रमोद, विकास गर्ग, विनोद शर्मा, विनोद गर्ग मौजूद रहे।
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यूं बढ़ा है किराया
महावीर कंप्यूटर के अनुसार पिछले साल पंजाब के लिए 95 रुपये प्रति क्विंटल का किराया था। इस बार 150 रुपये लिया जा रहा है। तरावड़ी के लिए 54 रुपये से किराया 70 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है। घरोंड़ा के लिए 52 रुपये से 65 रुपये कर दिया गया है।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बढ़ेगी परेशानी
फिलहाल मंडी में करीब तीन हजार क्विंटल धान पड़ा है, जींद की मंडी में प्रति वर्ष करीब 30 लाख क्विंटल धान आता है। अगले कुछ दिनों में धान की आवक बढनी है। यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आवक बढ़ेगी और उठान नहीं होने से मंडी में अव्यवस्था होगी।
कंप्यूटर के अनुसार पिछले साल जींद से धान ले जा रही तीन गाडिय़ां चोरी हुई थी। इस मामले में पुलिस सिर्फ एफआईआर दर्ज की गई है। अभी तक न तो धान बरामद हुआ है और न ही रिक्वरी। इसके अलावा इस बार भी ट्रांसपोर्टर्स इसकी गारंटी लेने को तैयार नहीं हैं।
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