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पहले मां-बच्चे की जान को खतरा बता गर्भवती को रेफर किया, एसएमओ के फोन करने पर करवाई डिलिवरी

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कटिंग करने से पहले पर्ची पर लिखा गया रेफर का केस। संवाद - फोटो : Jind
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नागरिक अस्पताल के हालात सुधारने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां प्रसव के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों को भय दिखाकर चिकित्सक पीजीआई रोहतक या खानपुर रेफर कर रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में ऐसे तीन मामले सामने आ चुके हैं, जिनको यहां से रेफर किया गया है। जब एक गर्भवती को रेफर किया गया तो उसके किसी जानकार ने उच्च अधिकारियों को फोन किया। इसके बाद मरीज की पर्ची से रेफर लिखे गए शब्दों को काट दिया गया और ऑपरेशन किया गया। अस्पताल में ऐसे कई मामले आते हैं, जब उनको रेफर कर दिया जाता है। इस पर आज तक प्रशासनिक अधिकारी या फिर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने कोई संज्ञान नहीं लिया है।
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गांव आलनजोगी खेड़ा निवासी 22 वर्षीय सविता को प्रसव पीड़ा होने के बाद रविवार शाम को सवा सात बजे नागरिक अस्पताल में लाया गया। यहां ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक ने सविता के पति अमित को बताया कि बच्चा उल्टा है तथा मां को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। जिससे यहां ऑपरेशन नहीं किया जा सकता। क्योंकि यहां पर इस प्रकार की सुविधा नहीं है और न ही बेहोश करने वाला चिकित्सक है। चिकित्सक ने कहा कि मां-बच्चे दोनों की जान को खतरा है। आप इसे जल्दी मेडिकल कॉलेज खानपुर ले जाओ। इसके बाद चिकित्सक ने मरीज की पर्ची पर रेफर का केस बना दिया। जब यह अमित के एक जानकार को पता चला तो उसने एसएमओ डॉ. गोपाल गोयल के पास फोन किया। डॉ. गोपाल गोयल ने महिला चिकित्सक के पास फोन किया। इसके बाद चिकित्सक ने मरीज की पर्ची से रेफर लिखे हुए शब्दों को काट दिया और ऑपरेशन करने की हामी भरी। कुछ देर बाद ऑपरेशन के जरिये महिला की डिलिवरी करवाई गई।
दो सप्ताह पहले भी इसी प्रकार का केस आया था सामने
लगभग दो महीने पहले भी इसी प्रकार प्रसव के लिए आई एक महिला को चिकित्सक ने रेफर कर दिया था। महिला के पति के एक जानकार ने इसी प्रकार उच्च अधिकारियों को फोन करके महिला को रेफर होने से बचाया था, जिसका बाद में नागरिक अस्पताल में ही ऑपरेशन किया गया।
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बिना पहुंच वाले मरीज हो जाते हैं रेफर
लगभग एक महीना पहले किशनपुरा निवासी एक महिला को भी इसी प्रकार प्रसव के लिए नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। उसे भी चिकित्सकों ने इसी प्रकार भय दिखाकर रेफर कर दिया। इस मरीज की कहीं कोई जान-पहचान नहीं थी, जिस कारण वह पीजीआई रोहतक में दाखिल हुई। महिला को नॉर्मल डिलिवरी से बच्चा पैदा हुआ था।
पहले बेहोशी का चिकित्सक अस्पताल में मौजूद नहीं था, जिस कारण केस को रेफर करना पड़ा। इसके बाद बेहोश करने वाले चिकित्सक पहुंच गए तो यहीं पर ऑपरेशन हो गया। -डॉ. गोपाल गोयल, एसएमओ।

वह पर्ची जिस पर मरीज को रेफर करने के बाद की गई कटिंग। संवाद- फोटो : Jind

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