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डीएपी खाद की मांग कर किसानों ने रेलवे स्टेशन मार्ग पर जाम लगाया, आश्वासन मिला तो माने

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डीएपी नहीं मिलने पर सड़क जाम कर बैठे किसान। संवाद - फोटो : Jind
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जींद/नरवाना। जैसे-जैसे गेहूं की बिजाई का काम रफ्तार पकड़ रहा है, डीएपी खाद की किल्लत और बढ़ रही है। जिले में सोमवार को दस हजार बैग का स्टॉक ही बचा हुआ है, जबकि करीब साढ़े तीन लाख बैग की जरूरत है। ऐसे में किसानों ने नरवाना में डीएपी नहीं मिलने पर रेलवे स्टेशन रोड पर जाम लगा दिया। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारियों ने 12 नवंबर को खाद पहुंचने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों ने जाम खोल दिया।
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जिले में एक सप्ताह पहले डीएपी के 23500 बैग आए थे। पहले ही दिन करीब आधा खाद उठ गया। इसके बाद तीन दिनों से जींद की पुरानी अनाज मंडी स्थित हैफेड खाद बिक्री केंद्र पर डीएपी समाप्त है, लेकिन निजी दुकानों पर डीएपी मिल रहा है। नरवाना क्षेत्र में भी डीएपी खाद की किल्लत लगातार जारी है। इसके चलते सोमवार को किसानों ने सुबह करीब साढ़े 11 बजे रेलवे स्टेशन पर जाम लगा दिया। किसानों ने कहा कि वे अपने काम-धंधे छोड़कर सुबह ही खाद लेने आते हैं, लेकिन नहीं मिलने के कारण उन्हें वापस जाना पड़ रहा है। किसानों ने कहा कि एक तो पहले ही फसलों के सही दाम नहीं मिल रहे, दूसरे डीएपी नहीं मिलने पर वे गेहूं की बिजाई भी सही समय पर नहीं कर पाएंगे। इससे पैदावार प्रभावित होगी। किसानों ने कहा कि सिंचाई कर जमीन गेहूं के लिए तैयार की है। अब खेत की नमी भी सूख रही है, लेकिन खाद नहीं मिलने के कारण वे बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। जाम की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसानों को समझाने का प्रयास किया। किसानों ने कहा कि जब तक डीएपी खाद नहीं मिलेगी, वे जाम नहीं खालेंगे। लगभग एक घंटे बाद ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने किसानों को बताया कि जल्द ही खाद का रैक आएगा। इसके बाद कोई कमी नहीं रहेगी। इस पर दोपहर करीब सवा 12 बजे किसान जाम खोलने पर राजी हो गए।
डीएपी की कालाबाजारी के आरोप
जाम लगा रहे किसानों ने कहा कि खाद गोदाम पर पहुंचती तो है, लेकिन जरूरतमंद किसानों को नहीं मिल पाती। कुछ दुकानदार महंगे भाव में व डीएपी के साथ अन्य वस्तुएं खरीदने पर ही खाद देते हैं। प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करते। इसके चलते काफी किसान सुबह चार बजे भी खाद के लिए लाइन में लगते हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल पाता। किसानों कहा कि इससे पहले आधी रात को कालाबाजारी करते पकड़ा गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसलिए किसानों का विश्वास अधिकारियों से उठ गया है। इस पर अधिकारियों ने कहा कि ऐसा करने वाले दुकानदारों की शिकायत दें, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।
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नरवाना में जींद से पहले मांग
नरवाना क्षेत्र में जींद क्षेत्र की तुलना में गेहूं की बिजाई पहले होती है। नरवाना क्षेत्र में धान की रोपाई जींद से पहले होती है और कटती भी पहले होती है। ऐसे में नरवाना में डीएपी की मांग पहले शुरू हो जाती है।
करीब दस हजार बैग का है स्टॉक
कृषि विभाग के गुणवत्ता नियंत्रक डॉ. नरेंद्र पाल ने बताया कि जिले में सोमवार शाम तक करीब दस हजार बैग डीएपी का स्टॉक बचा हुआ है। कुछ केंद्रों पर डीएपी समाप्त है, लेकिन 13 व 14 नवंबर को करीब 72 हजार बैग का एक रैक व कुछ मात्रा में दूसरा रैक आना है। जिले में करीब दो लाख बैग डीएपी बेचा जा चुका है। इस बार सरसों का क्षेत्र बढ़ने से डीएपी की मांग कम रहेगी। यह खेप आने के बाद जिले में डीएपी की किल्लत नहीं रहेगी। करीब 60 प्रतिशत किसान गेहूं की बिजाई कर चुके हैं।
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