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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला फूंका

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जींद। आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर ने भौंगरा, बड़ौदा, दनौदा, नरवाना, काकड़ौद व निडाना सहित अन्य गांवों में सरकार का पुतला फूंककर रोष प्रकट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मांगें पूरी करने की बजाए बर्खास्त पत्र निकालकर कर्मचारियों को दी रही है।
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जिला प्रधान भुला देवी, सचिव सुमन देवी, कोषाध्यक्ष सुदेश देवी, ब्लॉक प्रधान रमेश देवी, सुमन दनौदा, राजकुमारी, पुष्पा, सावित्री, लाजवंती, निर्मला, जयपति, सुदेश, मूर्ति, बिमल, कमला, बीरमति, राजकुमारी, शालू, प्रवीण, सुमन, जयपति, सुनीता, लक्ष्मी, सीमा, पूनम, सरोज, कृष्णा, किताबो, दर्शना, मुकेश ने कहा कि राज्य सरकार आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर की मांगों का समाधान करने की बजाए उन्हें धमकी दे रही है। उनके बर्खास्त करने के लिए पत्र जारी कर रही है। ऐसे में शनिवार को गांव-गांव में आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर लाभार्थियों व अन्य सीटू की यूनियनों के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर सरकार के पुतले दहन किए हैं। वहीं एक फरवरी को प्रदेश भर में ’दमन विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा। इसमें सर्व कर्मचारी संघ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ सहित सीटू से संबंधित तमाम यूनियन शामिल होंगी। भुला देवी ने कहा कि 31 जनवरी को किसान ’विश्वास घात दिवस’ मनाएंगे और जिला व तहसील स्तर पर केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इसमें आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स की मांगों को भी शामिल करने का फैसला लिया है। यूनियन की मांग है कि आंगनबाड़ी वर्कर वह हेल्पर को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। जब तक कर्मचारी नहीं बनाया जाता तब तक न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये लागू किया जाए। 2018 में की गई घोषणाओं को लागू करते हुए महंगाई भत्ते की तमाम किस्त मानदेय में जोड़कर दी जाए। महंगाई भत्ते का बकाया एरियर भी तुरंत दिया जाए। विभाग द्वारा बिना फोन व अन्य संसाधन दिए वर्कर्स पर ऑनलाइन काम का दबाव बनाना बंद किया जाए। प्रधानमंत्री द्वारा सिंतबर 2018 में की गई वर्कर्स व हेल्पर्स की 1500 एवं 750 रुपये की बढ़ोतरी को ऐरियर समेत दिया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर्स को पांच लाख व हेल्पर्स को तीन लाख रुपये सेवानिवृति लाभ दिया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को किसी भी विभागीय ट्रेनिंग या मीटिंग में बुलाने पर टीए व डीए दिया जाए। आंगनबाड़ी वर्कर व हेल्पर को दुर्घटना होने पर इलाज का पूरा खर्च व मृत्यु होने पर अन्य विभागों की तर्ज पर तीन लाख रुपये मुआवजा दिया जाए। नई शिक्षा नीति वापस हो। प्ले स्कूल के नाम पर आईसीडीएस का निजीकरण नहीं किया जाए। आईसीडीएस में किसी भी एनजीओ या प्राइवेट संस्था को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाए।
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