झज्जर। रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक रेलवे लाइन पर सात घंटे तक रेलगाड़ियों के पहिए थमे रहे। इस दौरान रेलवे ट्रैक पर केवल किसान नेताओं के भाषण के साथ चुटकलों पर किसानों के ठहाके, हुक्का व जलपान चला। सुबह दस बजे से शाम चार बजे तक किसान रेल रोको आंदोलन के दौरान रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक रेल मार्ग पर गांव गुढ़ा के पास पटरियों के बीचोंबीच बैठे रहे।
लखीमपुर खीरी में किसानों को कार से कुचलने के चलते संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने रेल रोको अभियान चलाकर रोष प्रकट किया। सुबह दस बजे से पहले से ही किसानों का जमावड़ा गांव गुढ़ा के पास रेलवे ट्रैक पर लगना शुरू हो गया था। सैकड़ों की संख्या में महिला व पुरुषों ने रेलवे यहां पहुंचकर रेलवे ट्रैक पर बैठ गए। इस कारण रेल झज्जर व डीघल के रेलवे स्टेशनों पर माल गाड़ियां खड़ी रही। शाम को जाम खोलने के बाद गाड़ियों को गंतव्यों की ओर रवाना किया गया। इस दौरान आंदोलनकारियों की ओर से सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। तीनों कृषि कानूनों को समाप्त करवाने के लिए किसान दिल्ली के विभिन्न बार्डरों पर करीब दस माह से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। रेल रोको अभियान के दौरान विभिन्न खाप प्रतिनिधियों ने अपनी भागीदारी निभाई।
पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
रेल रोको अभियान के दौरान शहर के रेलवे स्टेशन पर काफी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस दिनभर रेलवे स्टेशन पर गश्त करती रही। रेलवे पुलिस के अलावा शहर पुलिस की टीमें भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जाम स्थल व रेलवे स्टेशनों पर तैनात रह कर स्थिति पर नजर बनाए रही।
ये रहे मौजूद
रेल रोको अभियान के दौरान किसान नेता जेपी बैनीवाल, युद्धवीर धनखड़, उमराव कादयान, रामचंद्र यादव, रेनू कादयान, दीपक धनखड़, कपूर सिंह गुलिया, अतर सिंह, डॉ. ओमप्रकाश धनखड़, नीरज सिलाना, बिल्लू पहलवान, सरजीत गुलिया, सविता बेरी, निर्मला, शीला के अलावा अन्य मौजूद रहे।
गुढ़ा गांव के पास रेलवे लाइन पर धरने पर बैठी महिलाएं। संवाद- फोटो : Jhjhar