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जान जोखिम में डाल तिरंगा लेकर यूक्रेन से हंगरी बॉर्डर पहुंची रितिका

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झज्जर। यूक्रेन के हालात बहुत नाजुक हैं। करीब पांच दिन तक बंकरों में रहने के बाद माइनस डिग्री में तिरंगा लेकर हंगरी बॉर्डर की तरफ बढ़ते रहे। करीब सात घंटे में बार्डर पर पहुुंचे। इस दौरान केवल चिप्स व बिस्किट ही सहारा रहा। हंगरी पहुंचने के बाद उन्हें खाने-पीने की सुविधाएं मिलीं। यह बातें शनिवार को स्वदेश लौटी शहर के दिल्ली गेट निवासी रितिका धनखड़ ने कही।
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धनखड़ का कहना है कि यूक्रेन में एमबीबीएस दूसरे वर्ष की पढ़ाई कर रही थी, लेकिन रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। मिशन गंगा की तो तारीफ की, लेकिन यूक्रेन में इंडियन एंबेसी पर नाराजगी जताई। कहा जब हमारे पास पानी खत्म हो गया, तब इंडियन एंबेसी के लोगों से बात की। वे बता रहे थे कि उन लोगों के पास भी 3 दिन से पानी नहीं है। ऐसे में वे क्या करें। वहीं जब भारत ले जाने की बात कही गई तो इंडियन एंबेसी के अधिकारियों ने कहा कि अभी वे कुछ नहीं कर सकते हैं। अपने रिस्क पर निकल सकते हैं तो निकल जाओ। रितिका ने बताया कि कीव शहर को रूस की सेना ने बर्बाद कर दिया है। उनकी किस्मत अच्छी थी जो मिसाइल व बमों के धमाकों के बीच से सकुशल परिजनों के बीच लौट आई। एक बंकर में करीब 600 से 700 भारतीय व अन्य छात्र थे। लगातार खाने-पीने की चीजों की कमी हो रही थी।
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- अपने रिस्क पर निकल रहे छात्र-छात्राएं
यूक्रेन से वापस लौटी रितिका धनखड़ ने बताया की अपने रिस्क पर हाथ में तिरंगा झंडा लेकर उनका ग्रुप बंकरों से बाहर निकला ओर कीव से लवीव, उजग्रोथ होते हुए हंगरी के शहर चॉप ओर फिर जहोनी होते हुए बुडापेस्ट से एयरपोर्ट पर पहुंचे। वह अकेले ही यूक्रेन के विभिन्न क्षेत्रों से होकर हंगरी बार्डर पर पहुंची थी। हंगरी देश के नागरिकों की मदद को जिंदगी में कभी भी नहीं भूल सकती हूं। भारत सरकार को यूक्रेन में स्थित भारतीय दूतावास में कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। ताकि भारतीय छात्रों को समय रहते मदद मिल सके। जब भारत की आन बान और शान तिरंगे को छात्रों के हाथों में देख यूक्रेन और रसिया के लोग मदद कर रहे थे।
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- मां ने हलवा खिलाकर बेटी का किया स्वागत
रितिका धनखड़ के पिता कवर सिंह धनखड़ व मां सुमन देवी ने बताया कि समाचारों को देखने पर उनका दिल दहल जाता था, लेकिन उनकी बेटी के मोबाइल पर मैसेज व फोन से बातचीत करने पर थोड़ी राहत मिल जाती थी। शनिवार सुबह रितिका घर पहुंची तो उसकी मां ने उसका पसंदीदा बेसन का हलवा बनाया है। हलवा खिलाकर बेटी का स्वागत किया।
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