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Makar Sankranti 2024: 15 जनवरी को व्यतिपात योग में मनेगी संक्रांति, 16 से होगी शादी-विवाह के सीजन की शुरुआत

Wed, 10 Jan 2024 11:03 AM IST
नवीन दलाल संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)

सार

मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल लीप वर्ष के संयोग में सूर्य 15 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश कर रहा है, इसलिए मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। वहीं, 16 जनवरी से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।
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पंडित शियाराम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रहों के राजा सूर्य 15 जनवरी को धनु से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। अब 2080 तक मकर संक्रांति 15 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद फिर ज्योतिष गणना के अनुसार मकर संक्रांति एक दिन और बढ़ जाएगी। यानी सूर्य का राशि परिवर्तन हर वर्ष 16 जनवरी को होगा। इस बार सूर्य की राशि का परिवर्तन सुबह 9.13 बजे हो रहा है। खरमास समाप्त होगा और मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। तिथि व राशियों के गणित के हिसाब से अधिकतम त्योहारों का मान दो दिन होने से लोगों में काफी असमंजस की स्थिति रहने लगी है, लेकिन इस बार ज्योतिषाचार्यों में असमंजस नहीं है। 16 जनवरी से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे।

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ज्योतिषाचार्य प्रवीण शास्त्री के अनुसार, मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को 7 :15 बजे से शाम 5:46 बजे तक है। इस दौरान पूजन-दान और सूर्योपासना विशेष फलदायी होगी। इस बार 14 को सूर्य धनु राशि में ही हैं। यह अगले दिन सुबह 8:30 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसी के बाद पुण्य काल शुरू होगा साथ ही इस दिन खरमास खत्म होगा। इस बार व्यतिपात योग शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि शतभिषा नक्षत्र में सोमवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है। मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा के समान हो जाती है। इस दिन जाने-अनजाने में हुए पाप का क्षय हो जाता है।

पहले 12 व 13 जनवरी को मनाई जाती थी संक्रांति
काठ मंडी स्थित शिव-हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित शियाराम कहते हैं कि वेंकटेश्वर व शताब्दी पंचांग के मुताबिक, 14 जनवरी को मकर संक्रांति पहली बार 1902 में मनाई गई थी। 18वीं शताब्दी में 12 और 13 जनवरी को मनाई जाती थी। 1664 में संक्रांति पहली बार 15 जनवरी को मनाई गई थी। इसके बाद हर तीसरे साल अधिकमास होने से दूसरे व तीसरे साल 14 को, चौथे साल 15 जनवरी को संक्रांति होने लगी। हालांकि तारीख तय होने के बावजूद दो दिन पर्व पड़ने से लोगों में बीते वर्षों में काफी असमंजस रहा है। अबकी बार स्थिति साफ है। मकर संक्रांति 15 को मनाई जाएगी।

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11 को मनाई जाएगी अमावस्या
पौष माह की स्नान दान की अमावस्या 11 जनवरी वीरवार को है। अमावस्या के दिन पितरों को तर्पण देने, गरीबों को दान देने और गंगा जी या पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। अमावस्या के दिन व्रत रखने से भी कष्टों और संकट से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों पर कालसर्प या राहु केतु दोष होता है, इस दिन उपाय करने से उन्हें राहत मिलती है।

इससे करें परहेज

मकर संक्रांति के दिन नशे से दूर रहें। तामसिक भोजन से परहेज करें, किसी का अपमान न करें। पेड़ों की कटाई न करें और तुलसी की पत्तियों को न तोड़ें।

72 साल में बदलती है तारीख

ज्योतिषविदों के अनुसार, हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य व चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं। इसलिए एक दिन बढ़ जाता है। इस लिहाज से 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रात:काल में होने से पूर्व काल मानकर 15 जनवरी को मनाई जाती थी। मगर इसके पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मान्य थी। मगर अब ऐसा नहीं होगा, इनकी राशि परिवर्तन हमेशा प्रात: काल में ही होगी। 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। हालांकि 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मनाई जा रही थी।
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राशि अनुसार करें दान

मेष-लाल मिर्च, लाल वस्त्र और मसूर दाल।
वृषभ- सफेद तिल के लड्डू, चावल और चीनी।
मिथुन- हरी सब्जियां, मौसमी फल और साबुत मूंग।
कर्क- जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र और घी।
सिंह- गुड़, चिक्की, शहद और मूंगफली का दान।
कन्या-मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
तुला- सफेद वस्त्र, मखाना, चावल और चीनी।
वृश्चिक-मूंगफली, गुड़ और लाल रंग के गर्म कपड़े।
धनु-पीले वस्त्र, केले, बेसन और चने की दाल।
मकर- काले तिल के लड्डू और कंबल।
कुंभ-ऊनी कपड़े, सरसों तेल और चमड़े के जूते चप्पल।
मीन-पीली सरसों, चने की दाल और मौसमी फल। का दान करें।
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