11 को मनाई जाएगी अमावस्या
पौष माह की स्नान दान की अमावस्या 11 जनवरी वीरवार को है। अमावस्या के दिन पितरों को तर्पण देने, गरीबों को दान देने और गंगा जी या पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है और पूर्वजों को मोक्ष मिलता है। अमावस्या के दिन व्रत रखने से भी कष्टों और संकट से मुक्ति मिलती है। जिन लोगों पर कालसर्प या राहु केतु दोष होता है, इस दिन उपाय करने से उन्हें राहत मिलती है।
मकर संक्रांति के दिन नशे से दूर रहें। तामसिक भोजन से परहेज करें, किसी का अपमान न करें। पेड़ों की कटाई न करें और तुलसी की पत्तियों को न तोड़ें।
ज्योतिषविदों के अनुसार, हर साल सूर्य के राशि परिवर्तन में 20 मिनट का विलंब होता है। इस प्रकार तीन वर्षों में यह अंतर एक घंटे का हो जाता है। 72 वर्षों में 24 घंटे का फर्क आ जाता है। सूर्य व चंद्रमा ग्रह मार्गीय होते हैं। यह पीछे नहीं चलते हैं। इसलिए एक दिन बढ़ जाता है। इस लिहाज से 2008 में ही 72 वर्ष पूरे हो गए थे। हालांकि छह वर्षों तक सूर्य का राशि परिवर्तन प्रात:काल में होने से पूर्व काल मानकर 15 जनवरी को मनाई जाती थी। मगर इसके पहले सूर्य का राशि परिवर्तन संध्याकाल में होता था। इसलिए 14 जनवरी को मकर संक्रांति मान्य थी। मगर अब ऐसा नहीं होगा, इनकी राशि परिवर्तन हमेशा प्रात: काल में ही होगी। 1936 से मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जा रही थी। हालांकि 1864 से 1936 तक 13 जनवरी और 1792 से 1864 तक 12 जनवरी को मनाई जा रही थी।
मेष-लाल मिर्च, लाल वस्त्र और मसूर दाल।
वृषभ- सफेद तिल के लड्डू, चावल और चीनी।
मिथुन- हरी सब्जियां, मौसमी फल और साबुत मूंग।
कर्क- जरूरतमंदों को सफेद वस्त्र और घी।
सिंह- गुड़, चिक्की, शहद और मूंगफली का दान।
कन्या-मूंग दाल की खिचड़ी बनाकर जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
तुला- सफेद वस्त्र, मखाना, चावल और चीनी।
वृश्चिक-मूंगफली, गुड़ और लाल रंग के गर्म कपड़े।
धनु-पीले वस्त्र, केले, बेसन और चने की दाल।
मकर- काले तिल के लड्डू और कंबल।
कुंभ-ऊनी कपड़े, सरसों तेल और चमड़े के जूते चप्पल।
मीन-पीली सरसों, चने की दाल और मौसमी फल। का दान करें।