झज्जर। पिछले वर्ष जिले की अनाज मंडियों में साढ़े छह लाख क्विंटल से अधिक बाजरे की समर्थन मूल्य पर खरीद हुई थी। इस बार जब सरकार बाजरे की खरीद नहीं कर रही है और आढ़ती खुली बोली लगा रहे हैैं, जबकि सरकार भी भावांतर भरपाई योजना के तहत किसानों को 600 रुपये प्रति क्विंटल दे रही है। उसके बाद भी अनाज मंडी में अब तक पचास हजार क्विंटल बाजरा भी नहीं पहुंचा है।
इस बार बुधवार तक बाजरे की खरीद को करीब महीना गुजरने को है लेकिन अभी तक 1635 किसानों की ओर से मात्र 44383 क्विंटल बाजरा ही निजी आढ़तियों की ओर से खरीदा गया है। सवाल ये है कि आखिर बाजरा गया कहां? या तो पिछली बार बाजरा बाहर से लाकर बेचा गया था या इस बार बाजरे का किसानों ने पूरी तरह से स्टॉक कर दिया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल की बात की जाए तो 16 हजार से अधिक किसानों से 90 हजार एकड़ से अधिक भूमि का पंजीकरण कराया हुआ है। जबकि विभाग के आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में करीब 85 हजार एकड़ भूमि में बाजरे की बिजाई हुई थी। जिसमें से बारिश से भी करीब 20 फीसदी फसल खराब हो गई थी। संवाद
धान की खरीद की तैयारियां पूरी
अनाज मंडी के आढ़तियों की ओर से धान की खरीद को लेकर तैयारियां कर ली गई हैं। आढ़तियों ने खरीदारों को बुलाया है। आढ़तियों ने कहा कि यदि कोई भी किसान अपनी धान की फसल को बेचना चाहता है तो झज्जर अनाज मंडी में बेचने के लिए पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि बारिक धान की खरीद ही आढ़तियों की ओर से की जाएगी। 1509, 1121, 1718 बासमती 30 धान की किस्मों को आढ़तियों की ओर से खरीदा जाएगा।
वर्जन
बाजरे को सरकार की ओर से नहीं खरीदा जा रहा है। बारिश के कारण काफी बाजरा खराब हो गया है। सरकार की ओर से जो भी निर्देश आएंगे विभाग की ओर से उनका पालन किया जाएगा।
- मनीषा मेहरा, जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, झज्जर।
38 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे की बिजाई हुई थी। उसमें से भी फसल खराब हो गई थी। पिछली बार भी इसके आसपास बिजाई हुई थी, लेकिन इतना बाजरा कहां से आ गया था यह नहीं कहा जा सकता।
- इंद्र सिंह, डीडीए, कृषि व किसान कल्याण विभाग, झज्जर।
वर्जन
आढ़तियों की ओर से धान को खरीदने के लिए पूरी व्यवस्था कर ली गई है जो भी किसान धान को लेकर मंडी में पहुंचेगा उसका धान खरीदा जाएगा।
- सतबीर सिंह मल्हान, प्रधान आढ़ती एसोसिएशन, झज्जर।