डीएसपी के अनुसार, यह बातें एसआईटी द्वारा पूछताछ के दौरान शामिल किए गए अन्य व्यक्तियों ने भी बताई हैं। शिकायतकर्ता ने अपनी दरखास्त में आरोप लगाया था कि उनकी बेटी के साथ अनिल मलिक, अनूप चानौत व अन्य द्वारा छेड़खानी व खराब काम किया गया था। एसआईटी ने किसान नेता योगेंद्र यादव समेत 30 से अधिक व्यक्तियों को जांच में शामिल किया था। जिनका उपरोक्त मामले से किसी न किसी प्रकार से संबंध था। केस की एसआईटी द्वारा तफ्तीश लगातार जारी है।
पूछताछ के दौरान पुष्टि होने पर तीन अति वांछितों में से दो आरोपियों अनिल मलिक व अंकुर को गिरफ्तार कर लिया गया है। गांव नौरंगाबास जाटान निवासी अनिल मलिक घटना से पहले दिल्ली के पोचन पुर में रह रहा था और अंकुर चरखी दादरी के गांव मंदोला का निवासी है। जबकि अनूप चानौत हिसार जिला के गांव चानौत का निवासी है, जो अभी फरार है।
अंकुर पिछले काफी दिनों से छुपकर पुलिस की पकड़ से फरार चल रहा था। अदालत ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज कर दी थी। डीएसपी ने बताया कि वह नवंबर 2020 से किसान आंदोलन में टीकरी बॉर्डर पर सक्रिय था। वह अन्य साथियों के साथ मिलकर किसान सोशल आर्मी से जुड़कर काम करता था। इसी दौरान वह अपने संगठन के अन्य पदाधिकारियों के साथ मिलकर चुनाव में पश्चिम बंगाल गया था। जहां युवती की उससे व उसके साथियों से मुलाकात हुई थी।