झज्जर। प्रदेश की बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में कम नहीं हैं। चाहे खेल हो या कोई अन्य क्षेत्र। वे कदम से कदम बढ़ाते हुए कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ती जा रही हैं। गांव बादली के एक परिवार की पुत्रवधू पहलवान रौनक गुलिया किसी परिचय की मोहताज नही हैं।
महिला कुश्ती मुकाबले में भारत केसरी के अलावा अनेकों अवॉर्ड अपने नाम दर्ज कर चुकी हैं। महिला पहलवान रौनक गुलिया मूल रूप से रेवाड़ी जिले की रहने वाली हैं। स्कूली समय से ही कुश्ती का शौक रखने वाली रौनक को विद्यालय में एक अध्यापिका ने प्रोत्साहन दिया था। अध्यापिका ने कहा कि रौनक तुम अच्छी पहलवान बन सकती हो, जिसके चलते रौनक ने वर्ष 2016 से कुश्ती खेलना शुरू कर दिया और ढेरों ईनाम जीतने के लिए जी-जान लगा दी। महिला पहलवान ने विख्यात पहलवान रहे गुरु चदंगीराम के अखाड़े में रहकर कुश्ती के दांव-पेंच सीखना शुरू किया।
उसने भारत केसरी का अवॉर्ड वर्ष 2018 में जीता था इसके बाद महिला कुश्ती में सीनियर राष्ट्रीय प्रतियोगिता 2019 में कांस्य पदक हासिल किया था। गुलिया ने 2019 में अडंर-23 में राष्ट्रीय कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन करने का काम किया। साधारण किसान परिवार से संबंध रखने वाली रौनक गुलिया को ससुराल पक्ष की ओर से पूरा स्नेह व प्रोत्साहन मिला है और निरंतर आगे बढ़ने के लिए रौनक के पति अंकित गुलिया व सास-ससुर का सहयोग पूर्ण रूप से मिल रहा है।
रौनक गुलिया के पति अंकित गुलिया ने जानकारी देते हुए कहा कि पूरे परिवार ने रौनक को कुश्ती खेल में आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है और आगामी खेल प्रतियोगिता जोकि 2022 में एशियन खेल व ओलंपिक खेलों में सोना जीतने के लक्ष्य को लेकर वह लगातार मेहनत कर रही है।
प्रशिक्षक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि रौनक एक कर्मठ, मेहनती व कुश्ती के प्रति लग्न रखने वाली खिलाड़ी है। वह आगामी खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर जरूर लाएगी।