साल्हावास। दो बार राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित होने वाले जिले के गांव मोहनबाडी निवासी पूर्व एसीपी राजबीर सिंह जाखड़ ने भले ही दिल्ली जैसे महानगर में नौकरी की हो, लेकिन वे हमेशा अपने गांव की मिट्टी से जुड़े रहे। मौका मिलते ही लोगों का हाल-चाल जानने के लिए गांव पहुंच जाते। वह गांव से 8 किलोमीटर पैदल चलकर गांव बहू में पढ़ने के लिए जाते थे। 10वीं पास करने के बाद उन्होंने चरखी दादरी से 12वीं की। उन्होंने भिवानी से बीएससी की शिक्षा प्राप्त की और फिर महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से गणित में एमए की। वह दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर भर्ती हुए और क्राइम ब्रांच में कार्य किया। 1993 में उनके कार्यों से प्रभावित होकर राष्ट्रपति अवार्ड से उन्हें सम्मानित किया गया। 1999 में भी दूसरी बार उनको राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित किया गया।
गौशाला के प्रधान पद पर रहकर कर रहे नेक काम
74 वर्षीय पूर्व एसीपी राजवीर सिंह जाखड़ का मन सेवानिवृत्त के बाद भी महानगर में नहीं लगा। वे सेवानिवृत्ति के बाद अपने गांव में रहकर साल्हावास स्थित सर्वजातीय जाखड़ 36 खाप गोशाला में प्रधान पद पर रहते हुए गायों के लिए नेक कम कर रहे हैं। वे प्रतिवर्ष जाखड़ 36 खाप के चबूतरे पर क्षेत्र की खिलाड़ियों को सम्मानित करते हैं। वे योग शिविर, स्वास्थ्य शिविर, पौधरोपण जैसे जनहित के कामों में लगे रहते हैं तथा जन समस्याओं का समाधान करवाने के लिए तत्पर रहते हैं। हाल ही में लडायन स्थित माडल सांस्कृतिक राजकीय स्कूल के लिए सरकारी बस सेवा शुरू करवाई। बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए वे अपना योगदान दे रहे हैं।