चुनाव चाहे लोकसभा का हो या विधानसभा या फिर पंचायत का। चुनाव में विजेता प्रत्याशी सेे 10वें हिस्से से भी कम वोट प्राप्त करने वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो जाती है। साथ ही राशि कम होने के कारण अधिकतर हारने वाले प्रत्याशी इसे लेने नहीं जाते हैं।
यह राशि सीधे ही चुनाव आयोग के खाते में चली जाती है। पिछले पंचायत चुनाव की बात करें तो पंच, सरपंच, ब्लाक समिति सदस्य, जिला परिषद का चुनाव हारने के बाद करीब 49 हजार प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो गई थी और राज्य चुनाव आयोग के खाते में 54.19 लाख से अधिक की राशि गई थी। इस बार चुनाव आयोग को जमानत जब्त होने से एक करोड़ रुपये तक मिल सकते हैं।
वर्ष 2010 के पंचायत चुनाव में 1,15,639 पंच प्रत्याशियों ने नामांकन भरा था। सरपंच पदों के लिए 35,885, ब्लाक समिति सदस्य के लिए 15,128 और जिला परिषद के लिए 3,882 प्रत्याशी चुनावी रण में उतरे थे। चुनावी समर में कुल 1,70,534 प्रत्याशी मैदान में थे। इसमें करीब एक तिहाई के आसपास 49,630 प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे। इन प्रत्याशियों की करीब 54,19,080 रुपये जमानत रकम आयोग ने जब्त कर ली थी।
ऐसे बचेगी और वापस होगी जमानत
जमानत बचाने के लिए प्रत्याशी को विजेता के 10वें हिस्से से एक वोट अधिक लेना होता है। यानी विजेता प्रत्याशी को यदि कुल 500 वोट मिले हैं तो जिस प्रत्याशी के 51 से अधिक वोट होंगे उसकी ही जमानत बचेगी। इससे कम वाले प्रत्याशियों की जमानत राशि जब्त हो जाएगी। वहीं जमानत राशि वापस लेने के लिए प्रत्याशी को एक आवेदन पत्र लिखने के साथ विड्राल आवेदन भरना होगा। संबंधित खंड कार्यालय से उस पर हस्ताक्षर कराएगा। इसके बाद खजाना कार्यालय में आवेदन को दिखाकर प्रत्याशी यह राशि ले सकता है।
किसकी कितनी जमानत रकम
पद अनुसूचित सामान्य
पंच 40 100
सरपंच 100 200
ब्लाक समिति 150 300
जिला परिषद 200 400
---
प्रक्रिया के कारण छोड़ देते हैं राशि
90 प्रतिशत से अधिक प्रत्याशी चुनाव लड़ने के बाद जमानत रकम वापस लेने के लिए आवेदन नहीं करते। रकम बेहद कम होने और कई जगह हस्ताक्षर प्रक्रिया के कारण आवेदक इसे छोड़ देते हैं। प्रत्याशियों के मुताबिक जितनी राशि मिलनी होती है उससे ज्यादा प्रक्रिया और किराये-भाडे में खर्च हो जाती।
कोट्स
नियम के अनुसार चुनाव आयोग जमानत राशि जमा करता है। प्रत्याशी चुनाव हारने पर इसे वापस ले सकते हैं। इसके लिए एक आवेदन देना होता है। - राजीव शर्मा, राज्य चुनाव आयुक्त, हरियाणा