हिसार। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों को बंद किए जाने का चौतरफा विरोध हो रहा है। सोमवार को भी विद्यार्थियों ने गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय और दयानंद कॉलेज के बाहर प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने कहा कि कोरोना की वैक्सीन लगने के बाद भी विश्वविद्यालय और कॉलेजों को बंद करना सरकार और सिस्टम की मंशा पर सवाल खड़े करता है। शहर के तीनों विश्वविद्यालयों एचएयू, जीजेयू और लुवास में ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों हॉस्टल खाली करने के आदेश दिए हैं, जिसका विद्यार्थियों ने सोमवार को भी लगातार दूसरे दिन भी विरोध किया। विद्यार्थियों ने विवि के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज के फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे एचएयू और जीजेयू दोनों विवि के कुलपति हैं। फिर भी एचएयू के हॉस्टल बंद नहीं किए गए, लेकिन गुजवि में विद्यार्थियों को हॉस्टल खाली करने के निर्देेश दिए जा रहे हैं। छात्राओं ने कहा कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई नोटिस नहीं आया कि हॉस्टल बंद कर दिए जाएं तो विश्वविद्यालय प्रशासन क्यों हॉस्टल बंद कर रहा है।
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झुका विवि प्रशासन, शोधार्थी हॉस्टल में रहेंगे -
विद्यार्थियों के प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोद्यार्थियों और विदेशी छात्रों को हॉस्टल में रहने की छूट दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों को कहा कि जब ऑफलाइन कक्षा नहीं लगेगी, तो विद्यार्थियों का छात्रावास में रहने का कोई मतलब नहीं है। विद्यार्थी हॉस्टल में रहेंगे, तो मैस में खाने के दौरान और हॉस्टल में रहने के दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन नहीं हो पाएगा। लंबी जद्दोजहद के बाद विवि प्रशासन ने सिर्फ विदेशी और शोधार्थी छात्राओं को हॉस्टल में रहने की छूट दे दी। हालांकि विद्यार्थियों ने कहा है कि अब जरूरतमंद विद्यार्थी भी हॉस्टल में रुक सकते हैं।
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पहले ही 1 माह के 6500 रुपये ले चुका प्रशासन -
विद्यार्थी करीब 5 घंटे तक धरना-प्रदर्शन करते रहे। छात्र-छात्राओं ने कहा कि हॉस्टल खाली करने से उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। न तो वे प्रेक्टिकल वर्क कर पाएंगे और न ही थीसिस पूरी कर पाएंगे। हॉस्टल बंद के आदेश न आने के बावजूद हॉस्टल बंद करने के आदेश दिए गए हैं, जबकि कोरोना नियमों के साथ वह हॉस्टल में रह सकते हैं। छात्रों का आरोप है कि विवि प्रशासन उनसे एक माह की हॉस्टल फीस 6500 रुपये ले चुका है और अब हॉस्टल खाली करवा रहे हैं। अब तक फीस रिफंड के बारे में भी जीजेयू के अधिकारियों ने कोई सूचना जारी नहीं की है।
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कोट -
हॉस्टल में वाई-फाई की सुविधा मिल जाती है, जिससे ऑनलाइन क्लासेज लगाने में आसानी होती है। घर पर इंटरनेट की समस्या होने के कारण वे ऑनलाइन कक्षाएं नहीं लगा पाएंगे। जिन विद्यार्थियों को दोनों डोज लग चुकी हैं, उनकी कक्षाएं बंद नहीं करनी चाहिएं थीं।
- मोनिका वर्मा, उप प्रधान, एबीवीपी।
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कोट -
सरकार के निर्देशानुसार ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी गई हैं, लेकिन अभी हमारे पास हॉस्टल खाली करवाने को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं आई हैं। ऐसे में हॉस्टल खाली नहीं करवा गए हैं।
- डॉ. संदीप आर्य, मीडिया एडवाइजर, एचएयू।
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कोट -
हॉस्टल में विदेशी विद्यार्थियों और शोद्यार्थियों को हॉस्टल में रहने की छूट दी गई है, ताकि वे यहां अपना रिसर्च कार्य आसानी से कर पाएं और विदेशी छात्रों को ट्रैवलिंग की समस्याओं के कारण हॉस्टल में रखा जाएगा।
- प्रो. विनोद बिश्नोई, प्रॉक्टर, गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय।
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कोट -
जिला प्रशासन के निर्देशानुसान ऑफलाइन कक्षाएं बंद कर दी गई हैं। हॉस्टल बंद करने के आदेश नहीं हैं। बच्चे हॉस्टल में ही रह रहे हैं।
- डॉ. गुरदियाल सिंह, कुलपति।