हिसार। रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बीच यूक्रेन में रह रहे हजारों भारतीय विद्यार्थी वहां फंसे हैं। कुछ ने अपने आप को घरों के अंदर कैद कर लिया है तो कुछ हॉस्टल की बेसमेंट में दिन-रात गुजार रहे हैं। ओडोसा में रहने वाले चार छात्रों का कहना है कि जब उन्होंने भारतीय दूतावास में बात की तो उन्होंने कहा कि सड़क मार्ग के जरिए हंगरी बॉर्डर पर पहुंच जाएं। यहां पर फ्लाइट की व्यवस्था है। लेकिन लगातार हो रही बमबारी के बीच 700 किलोमीटर का सड़क मार्ग का सफर विद्यार्थी कैसे तय करें। दूसरी तरफ यूक्रेन की सरकार द्वारा लगातार एडवाइजरी जारी की जा रही है कि घर और हॉस्टल से बाहर न निकलें। भारत से परिजन बार बार फोन करके उनका हाल चाल जान रहे हैं। अब उन्हें कैसे बताएं कि बम धमाकों की आवाजें लगातार सुनाई दे रही हैं और सहमे विद्यार्थी शांति की दुआ कर रहे हैं। संवाद
यहां के लोग खाली कर रहे शहर
कैमरी मार्ग पर पालिका विहार निवासी 25 वर्षीय अमरदीप से फोन पर जब बात की तो उन्होंने बताया कि वे यूक्रेन के ओडेशा शहर में है। वह यहां पर मेडिकल नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा है और किराये के एक कमरे में चार दोस्त रहते हैं। दो दिन से लगातार यहां पर बमबारी हो रही है। उन्होंने खुद को कमरे के अंदर कैद कर लिया है। स्थानीय लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं। यहां से चलने वाली ट्रेन भी बंद है और स्थानीय लोग अपने निजी वाहन के जरिये यहां से निकल रहे हैं। अमरदीप ने बताया कि जब हमने भारतीय दूतावास में बात की तो वहां से अधिकारी ने कहा कि हंगरी बॉर्डर तक आ जाएं, लेकिन बमबारी के बीच 700 किलोमीटर की दूरी सड़क मार्ग से तय करना आसान नहीं है। कमरे से बाहर निकलने से भी डर लग रहा है।
बेसमेंट में ही रहने के आदेश, शुक्रवार को रेड अलर्ट जारी
नागरिक अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स की बेटी खुशी शर्मा से जब व्हाट्सएप पर बात की तो उसने बताया कि वह कीव में है। यहां हॉस्टल के बेसमेंट में करीब 500 छात्र-छात्राएं हैं। दो दिन से लगातार हो रहे बम धमाकों के बाद कॉलेज प्रशासन ने बेसमेंट से ऊपर जाने से मना कर दिया है। बेसमेंट में रेंज की दिक्कत होती है ऐसे में घरवालों से बात नहीं हो पा रही है। रात करीब तीन बजे हॉस्टल के पास बेस कैंप पर बमबारी हुई थी। सुबह भी बम धमाके हुए।
चेर्नोबिल परमाणु यंत्र केंद्र पर कब्जा
छात्रा ने बताया कि यहां की सरकार द्वारा एडवाइजरी जारी कर बताया जा रहा है कि रूस की वायु सेना ने चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र केंद्र पर कब्जा कर लिया है। एक ओवरब्रिज को भी उड़ा दिया है। यहां से कोई भी फ्लाइट नहीं चल रही है। यहां की सरकार ने कहा कि बाहर मत निकलें। भारत की तरफ से किसी ने भी यहां फंसे लोगों से कोई बात नहीं की है।
बीस दिन पहले आना था, जुर्माने की वजह से नहीं आई
छात्रा खुशी की मां ने बताया कि बेटी को बीस दिन पहले कीव से भारत लौटना था। बेटी ने बताया कि अभी ऑफलाइन क्लास लग रही है। अगर, एक क्लास नहीं लगाई तो तीन हजार रुपये जुर्माना लगेगा। एक दिन में तीन क्लास लगती हैं। क्लास नहीं लगाई तो एक दिन का जुर्माना 9 हजार रुपये बनता है। ऐसे में बेटी ने आने से इंकार कर दिया। अब बेटी की 26 फरवरी की टिकट बुक करवाई थी। पहले टिकट 24 हजार रुपये की बुक होती थी लेकिन अब 65 हजार रुपये में बुक की है। लेकिन अब वहां पर हालात खराब हैं। पता नहीं, बेटी कल वहां से निकलेगी या नहीं।
सेना की तैनाती से पता चल गया था
सेक्टर 1-4 में रहने वाले शिवम शर्मा ने बताया कि वह अपने दोस्त खरड़ निवासी रोहित के साथ यूक्रेन के खारकिव शहर गया था। वे वहां के मेडिकल नेशनल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस करने गए थे। शिवम ने बताया कि 14 फरवरी को घरवालों से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान उन्हें बताया कि यहां के हालात सही नहीं लग रहे। यहां के स्थानीय लोगों से बात की तो उन्होंने कहा कि हालात खराब भी हो सकते हैं। इसके अलावा यहां पर सेना भी लगा दी है। घरवालों ने वहां से भारत आने की बात कही। उसके बाद 17 फरवरी को दोस्त रोहित के साथ भारत आ गया।