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यूक्रेन संकट: छात्र की आपबीती, '20 मीटर की दूरी पर बम गिरा, सांसें थम गई थीं, यूक्रेन सैनिकों ने बंकर में छुपाया'

Mon, 07 Mar 2022 12:54 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार (हरियाणा)

सार

यूक्रेन में फंसे हिसार के छात्र ने बताया कि खारकीव से 22 किलोमीटर पैदल चले, चार दिन बाद रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे। 1100 किलोमीटर सफर के बस बाले ने एक बच्चे से 500 डॉलर लिए। 
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रोमानिया के एक सेफ हाउस में छात्र अंशुमन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के बीच भारतीय छात्र वहां से निकलने पर मजबूर हैं। बमबारी और गोलियों के बीच छात्र अपने दम पर वहां से निकल कर साथ लगते बॉर्डरों पर पहुंच रहे हैं। भारतीय छात्रों को कई किलोमीटर पैदल चलने के साथ-साथ बस या ट्रेन में भूखे प्यासे रह कर खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। कई छात्रों ने आंखों के सामने बम गिरते देखे हैं।

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भयानक माहौल के बीच वहां के स्थानीय लोग भारतीय विद्यार्थियों से मन मर्जी के पैसे वसूल रहे हैं। अपनी जान बचाने के लिए चालकों को अच्छी खासी रकम देनी पड़ रही है। रविवार को काफी संख्या में विद्यार्थी रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचे और यहां से सेफ हाउस चले गए हैं।

बम गिरा तो मच गई अफरा तफरी 
हरियाणा के हिसार के सिविल अस्पताल परिसर में रहने वाले छात्र अंशुमन ने बताया कि वह 2 मार्च की सुबह खारकीव से रेलवे स्टेशन के लिए निकले। वहां पर ट्रेन के अंदर घुसने नहीं दिया। उसके बाद 400 विद्यार्थियों का समूह पैदल ही सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए निकाला। करीब 22 किलोमीटर दूर पैदल चलने के लिए पिसाचिन जगह पर पहुंचे।
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इस सफर में काफी तकलीफ उठानी पड़ी। एक बार तो 20 मीटर की दूरी पर एक गोला आकर गिरा। एक बार तो सब की सांसें थम गईं। उसके बाद अफरा तफरी का माहौल बन गया। वहां पर मौजूद यूक्रेन सैनिकों ने हौसला दिया और कुछ देर के लिए अपने बंकरों में जगह दी। जब माहौल शांत हुआ तो फिर से चले और कई घंटों के सफर के बाद पिसाचिन पहुंचे। यहां पर एक दिन रुके। 

एक बच्चे से 500 डॉलर लिए
पिसाचिन से रोमानिया बॉर्डर का सफर 1100 किलोमीटर का था। पेट्रोल पंप बंद थे। हर जगह बमबारी हो रही थी। कोई वाहन नहीं मिल रहा था। फिर एक बस वाले ने कहा कि वह एक छात्र से 500 डॉलर लेगा और रोमानिया बॉर्डर पर पहुंचा दूंगा। उसके बाद सभी ने सहमति जताई और बस किराये पर की। करीब तीस घंटें का सफर बस में तय किया। भूखे प्यासे रहे। खाने पीने की कोई व्यवस्था नही थी।

सड़कों पर काफी जाम था। हर कोई बॉर्डर की तरफ जा रहा था। इस कारण बॉर्डर पर पहुंचने में काफी समय लगा। रात के समय बस की लाइट और मोबाइल फोन बंद करवा दिए जाते। रास्ते में किसी ने कोई मदद नहीं की। रविवार सुबह रोमानिया बॉर्डर पार किया। यहां पर दूतावास ने खाने पीने और रहने की व्यवस्था की। अब टिकट मिलने के बाद यहां से चलेंगे। 

14 किलोमीटर चलकर ट्रेन पकड़ी, दूतावास ने कहा-खाली कर दो ट्रेन, आधी ब्रेड के सहारे तय किया सफर 
हिसार के मिलगेट एरिया स्थित गर्वमेंट कॉलोनी में रहने वाले प्रकाश स्वामी की बेटी अक्षिता यूक्रेन के खारकीव की मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही है। उसने बताया कि 2 मार्च तक वे बंकर के अंदर रहे। बाहर बमबारी हो रही थी। उसके बाद दूतावास ने खारकीव खाली करने को कहा। 2 मार्च की सुबह कर्फ्यू में ढील दी हुई थी। करीब छह बजे रेलवे स्टेशन के लिए निकले।

करीब 14 किलोमीटर भागते हुए रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। स्थानीय लोग ट्रेन में चढ़ने नहीं दे रहे थे। ऐसे में धक्का मुक्की करने के बाद ट्रेन में जगह मिली। ट्रेन कुछ दूर चलने के बाद रुक गई उसे सिग्नल नहीं मिला। वहां पर हमें दूतावास की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई कि ट्रेन को खाली कर दो। दूतावास की तरफ से तीन लॉकेशन दी गई और कहा गया कि जितना जल्दी हो सके, यहां से चले जाएं।

इसके बाद ट्रेन से उतरे और 22 किलोमीटर दूर पिसाचिन स्थान पर जाने लगे। हम करीब 280 विद्यार्थी थे। सभी एक साथ चल रहे थे। कभी दौड़ लगा रहे थे तो कभी पैदल चल रहे थे। हर कोई एक दूसरे की मदद कर रहा था। भूखे प्यासे होने के कारण काफी परेशानी आ रही थी। मगर सुरक्षित स्थान पर पहुंचना था इसलिए चलते रहे। रास्ते में कहीं कहीं पर बमबारी भी हो रही थी।

डर लग रहा था लेकिन सभी चल रहे थे तो चल पड़े। पैदल चलकर रात को पिसाचिन पहुंचे। यहां पर बंकर में रुके। पूरे दिन के भूखे प्यासे थे यहां पर भी खाने के लिए कुछ नहीं मिला। यहां पर तीन दिन रुके। पहले दिन पूरा दिन एक आधी ब्रेड और एक कप ब्लैक चाय दी। अगले दिन सूप और ब्रेड दी गई। 5 मार्च को खाना दिया गया।

वहीं जब बस वाले से रोमानिया जाने की बात कही तो चालक ने हर एक बच्चे से 500 डॉलर मांगे। पैसे देने वालों को चालक बैस में बैठा रहा था, लेकिन हमारे पास इतने पैसे नहीं थे। रविवार सुबह चार बसों में सवार होकर रोमानिया के लिए निकले हैं।

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