हिसार। प्रदेश के किसानों को अब मौसम के पूर्वानुमान के साथ 15 दिन पहले ही आशंकित फसली कीटों और रोगों की जानकारी दी जाएगी। एचएयू की ओर से मौसम अलर्ट की तरह यह संदेश किसानों के पास मोबाइल पर भेजा जाएगा। हम किसानों को कीटनाशकों की बजाय मित्र कीटों की मदद से हानिकारक कीटों पर नियंत्रण करने का प्रशिक्षण देंगे। यह कहना है चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति प्रो. बीआर कांबोज का। उन्होंने अमर उजाला कार्यालय में पहुंचकर अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। साथ ही किसान कल्याण के लिए तैयार किए गए रोडमैप से भी अवगत कराया।
सवाल : कुुलपति के तौर पर शुरू की पारी में आपकी क्या प्राथमिकताएं रहेंगी?
जवाब : मैं खुद किसान परिवार से आया हूं, मैंने जब से नौकरी शुरू की तब से किसान कल्याण के लिए काम कर रहा हूं। हर समय किसानों की आर्थिक तरक्की के लिए सोचता हूं। कम से कम खर्च में किसानों को अधिक उत्पादन मिले, इसके लिए प्रयासरत हूं। फसलों में न्यूट्रीशियन वैल्यूू बढ़ाने पर फोकस रहेगा। कम में पानी तैयार होनी वाली फसलों की किस्म विकसित करेंगे।
सवाल : हरियाणा, पंजाब की सबसे बड़ी समस्या पराली की है। इसका समाधान क्या हो सकता है?
जवाब : शोध संस्थानों ने इस पर काफी काम किया है। जन भागीदारी से ही पराली की समस्या का समाधान हो सकता है। इसके लिए किसानों को सहयोग करना होगा। खेत से निकले उत्पाद में हम अनाज के बाद बचे सभी अवशेष को खेत में ही डालें। ऐसा करने से खेत में पोषक तत्व बने रहेंगे। पराली को जलाने की बजाय उसे गला-सड़ाकर कर खेत में ही प्रयोग करना चाहिए। ऐसा न हो सके तो अवशेष के तौर पर बेच दें। इसे बिजली उत्पादन, बायोडीजल, एथोनॉल, गत्ता उत्पादन आदि के रूप में सदुपयोग करना चाहिए।
सवाल : एचएयू में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए क्या योजना है?
जवाब : हम रिसोर्स शेयरिंग पर काम कर रहे हैं। संसाधनों का सही उपयोग हो, इसके लिए काम करना होगा। देश ही नहीं दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी से एजुकेशन-रिसर्च के क्षेत्र में एमओयू कर रहे हैं। ड्यूल डिग्री कोर्स के तहत कॉलेज ऑफ बायो टेक्नोलॉजी, फिशरीज कॉलेज भी करिअर की नई दिशा तय करेंगे।
सवाल : कीटनाशकों का दुरुपयोग रोकने के लिए क्या करेंगे?
जवाब : हम किसानों का खर्च घटाने के लिए प्रयासरत हैं। कीटनाशकों का अंधाधुंधा प्रयोग बंद होना चाहिए। यह पर्यावरण के साथ-साथ किसानों को भी आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम ऐसे लाभकारी कीटों की पहचान कर रहे हैं, जो हानिकारक कीटों को नष्ट करेंगे। गन्ने के लिए हमारा रिसर्च काफी हद तक कामयाब हो चुका है। किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अब हमें उत्पादकता के साथ-साथ भोजन के पोषक तत्वों में बढ़ोतरी करनी है।
सवाल : एचएयू का एग्री बिजनेस का मॉडल कितना कारगर रहा?
जवाब : यह मॉडल किसानों की आय बढ़ा रहा है। एग्री बिजनेस सेंटर में 60 लघु उद्यमी तैयार हो चुके हैं, जो खुद के कारोबार में 10 से 20 लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। किसानों को अपनी फसल तैयार करने के साथ उसकी मार्केटिंग करनी होगी। कृषि जोत लगातार छोटी हो रही है। ऐसे में किसानों को समूह बनाकर खेती करनी होगी, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिलेगा।
सवाल : कौन से रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है?
जवाब : फसलों की बेहतर किस्मों के प्रोजेक्ट पर काम चलता रहता है। हमने हाल ही में गन्ने की नई किस्म सीओएच-160 दी है। अब किसानों को टिश्यू कल्चर से तैयार बीज किसानों को उपलब्ध कराने के लिए काम कर रहे हैं। एचएयू में विकसित डब्ल्यूएच-1142 गेहूं की किस्म केवल दो पानी में ही तैयार हो जाती है। किसानों के खेतों में कपास की नई किस्म को भी परखा है।