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ई-साक्षर तलवंडी राणा में दो हजार मोबाइल का बनाया नेटवर्क

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गांव तलवंडी राणा में कंप्यूटर का प्रशिक्षण लेतीं महिलाएं। - फोटो : Hisar
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हिसार। डिजिटल इंडिया का सपना जमीनी स्तर पर दिखाई दिया है। करीब तीन वर्ष पहले तलवंडी राणा गांव के सात उत्साही युवाओं ने गांव को प्रदेश का पहला ई-साक्षर गांव बनाने की कवायद शुरू की थी। तीन साल की मेहनत से अब यह गांव ई-साक्षर बन गया। युवाओं ने बिना किसी सरकारी मदद के गांव की तस्वीर को बदला है। अब दो हजार मोबाइल धारकों को इस मुहिम के माध्यम से एक साथ संदेश भेजा जा रहा है। एक माह बाद गांव के प्रत्येक परिवारों को उनकी जरूरत के अनुरूप संदेश या अन्य जानकारी प्रदान होने लगेगी।
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गांव को ई-साक्षर बनाने इस मुहिम के तहत ग्रामीणों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी, उपयोग, इंटरनेट व उसके उपयोग की जानकारी के अलावा डिजिटल लॉकर बनाने, ऑनलाइन बिजली का बिल भरने, रेलवे की टिकट बुक करने, मौसम की जानकारी प्राप्त करने, सरकारी व प्राइवेट क्षेत्र की नौकरियों की जानकारी प्राप्त करने से लेकर डिजिटल तकनीकों के उपयोग के अलावा ई लॉकर की जानकारी दी जा रही है।
इन तथ्यों की मिलती है जानकारी
रोजगार की जानकारी, राशन डिपो पर वितरण से जुड़ी जानकारी, शिक्षा से जुड़ा कोई तथ्य, मौसम का पूर्वानुमान हो या ग्राम विकास से जुड़ी कोई भी खबर या अन्य कोई सार्वजनिक महत्व की सूचना। जैसे: कोई रक्त जांच शिविर लगना है, मतदाता जागरूकता शिविर लगना है, कोई मुनादी करानी है, बिजली का बिल जमा करने की सूचना देनी है या अन्य कोई इसी प्रकार की सूचना।
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हर जानकारी निशुल्क कराई जा रही उपलब्ध : सेलपाड़
राह ग्रुप फाउंडेशन के चेयरमैन नरेश सेलपाड़ के अनुसार तलवंडी राणा गांव को ई-साक्षर कार्यक्रम बनाने के उनके अभियान के तहत प्रत्येक वर्ग की जरूरतों का ध्यान रखा गया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उनकी जरूरतों के हिसाब से व्हाट्सएप ग्रुप तैयार किया गया है।स्कूल संचालकों को भी उनकी जरूरतों के हिसाब से डिजिटल तकनीक का उपयोग करके अभिभावकों से जुड़ने की कला सिखाई जा रही है। विद्यार्थियों को नौकरी व भविष्य में आने वाले कोर्स की जानकारी प्रदान की जा रही है। यह जानकारी पूर्ण रूप से नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जा रही है। मुहिम में ट्रेडिंग ऑपरेटर के रूप में कार्यरत विनय वर्मा, गांव धांसू में लक्ष्य पब्लिक स्कूल के सह-संचालक मास्टर रमेश वर्मा, विद्यार्थी पवन जागड़ा, रामबीर, डॉ. रामफल वर्मा, मास्टर सुरेश खटाणा सहयोग दे रहे हैं। इसके अलावा गांव के प्रत्येक विद्यार्थी, स्कूल संचालक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा वर्कर, युवा क्लब का साथ मिल रहा है।
प्रत्येक गांव बन सकता है ई-साक्षर
प्रदेश के प्रत्येक गांव से दस युवा मुहिम से जुड़ने को तैयार हो तो मात्र छह माह में सभी गांवों को ई-साक्षर बनाया जा सकता है। सेलपाड़ का मानना है कि हमें बदलाव के लिए सरकार की तरफ देखने की बजाय स्वयं पहल करनी चाहिए। यदि इस मामले में नेहरू युवा केंद्र, दूसरी सामाजिक संस्थाओं व ग्राम पंचायतों को साथ लेकर व्यापक स्तर पर अभियान छेड़ने की जरूरत है। इसके बाद जैसे-जैसे इसके लाभों का आभास होगा, आम जनता अपने आप मुहिम से जुड़ जाएगी।
ये है गांव का इतिहास:
कभी हिन्दू व मुस्लिम आबादी के आपसी सामंजस्य के लिए चर्चित गांव तलवंडी राणा ने अब अपनी ई-साक्षर गांव के रुप में अपनी अलग पहचान बना ली है। हिसार शहर के साथ ही बसे इस गांव के बारे में माना जाता है कि इसे महाराणा प्रताप के वंशजों ने बसाया था। पहले राणा के वंशज इस क्षेत्र में अपने पशु चराने के लिए बरसाती मौसम में आते थे। वे यहां लंबे अंतराल तक यहां रहने के बाद सर्दियों में ही राजस्थान वापस जाते थे। इसी कारण से इसका नाम राणा का ताल बाद में समय के साथ तलवंडी राणा पड़ा। यह गांव लंबे समय तक मुस्लिम आबादी का गढ़ रहा है। आजादी से पहले तक गांव की करीब 45 फीसदी आबादी मुस्लिम होती थी। देश के विभाजन के बाद यहां के मुसलमान पाकिस्तान के मुल्तान व लाहौर चले गए तो वहां के हिंदुओं को यहां गांव की जमीन अलॉट की गई। वर्तमान में इस गांव की शत फीसदी आबादी हिन्दू है।
क्या-क्या हैं सुविधाएं:-
गांव में पंचायत भवन, सीनियर सेकेंडरी स्कूल, मंदिर, पक्की गलियां, बिजली, जलघर, डाकघर, पांच आंगनवाड़ी भवन, पंचायत भवन, पशु अस्पताल, विकास भवन सहित विभिन्न प्रकार की सुविधाएं है। साथ ही गांव की जमीन पर गोशाला, स्प्लैश फन पार्क, मार्बल सिटी, निजी बी.ई.एड. कॉलेज सहित दो बड़े सरकारी संस्थान बने हुए हैं।
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ये रहे हैं अब तक के सरपंच:-
गंगाराम हाकला
रामलाल भाटिया
श्योकरण कोहली
शंकर सूबेदार
उमेद डोई
धर्मपाल कोहली
देवत राम
चन्द्रो देवी कोहली
साधुराम खटाणा
प्रेम कुमारी कोहली ------------
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आंकड़ों में गांव की स्थिति:
आबादी: 7750
घर: 1710
साक्षरता दर: 99 फीसदी
मतदाता: 4025
सरकारी व प्राइवेट नौकरियों में जुड़े लोग: 386
खेती बाड़ी व उससे जुड़े धंधे से जुड़े लोग: 800
स्वरोजगार से जुड़े ग्रामीण: 107
स्कूलों की संख्या: छह
आंगनबाड़ी केन्द्र: छह
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