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शिक्षा विभाग व समाज कल्याण विभाग के चक्कर काट रहे हैं दिव्यांग छात्र, नहीं हो रहे फार्म जमा

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लघुसचिवालय के बाहर धरने पर बैठे दिव्यांगजन। - फोटो : Hisar
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हिसार। लघु सचिवालय के सामने सोमवार को अपनी मांगों के समर्थन में दिव्यांगजनों ने विकलांग अधिकार मंच हरियाणा के बैनरतले हरियाणा सरकार के विरोध में प्रदर्शन किया। दिव्यांगों ने अपनी मांगों को लेकर उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र सौंपा।
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ऋषिकेश राजली ने बताया कि देश में लगभग 15 लाख दिव्यांग हैं, जिनमें से करीब 1 लाख 80 हजार ही पेंशन ले रहे हैं। इसमें से पेंशन का लगभग एक चौथाई हिस्सा वह है जो अपने बच्चों और अपनी पत्नी को निराश्रित पेंशन के तौर पर मिलता है। ऋषिकेश राजली ने बताया कि अब यह पेंशन 6 महीने से नहीं मिल रही है। उनका आरोप है कि हरियाणा सरकार ने वेरीफिकेशन के नाम पर छेड़खानी करके दिव्यांगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। हरियाणा में इनकी आबादी लगभग 30 हजार के करीब है।
ऋषिकेश राजली ने बताया कि मेडिकल प्रमाण पत्र सही है या गलत है, यह तो डाक्टरों का बोर्ड ही बता सकता है लेकिन विभागों के कर्मचारी ही दिव्यांगों के मेडिकल सर्टिफिकेट खारिज कर रहे हैं।
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जिला समाज कल्याण में दिव्यांग बच्चों को छात्रवृति मिलती थी, अब समाज कल्याण विभाग आवेदनों को नहीं ले रहा है। कहा जा रहा है कि शिक्षा विभाग में जमा कराना पड़ेगा। लेकिन शिक्षा विभाग में जाते है तो वहां पर फार्म लेने से मना कर दिया जाता है और वह कहते हैं कि हमारे पास किसी प्रकार का कोई आदेश नहीं आया है। दिव्यांग छात्रों के माता-पिता दफतरों के चक्कर काट-काट कर परेशान हो रहे हैं।
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ये हैं मुख्य मांगे
-दिव्यांगों को 40 प्रशित पर पेंशन लागू करते हुए सभी पेंशनर होल्डर की पत्नी और बच्चों और दिव्यांगों की देखभाल करने वाले को निराश्रित पेंशन दी जाए।
- दिव्यांगों की पत्नियों की छह महीने से रुकी हुई पेंशन जल्द भेजी जाए।
सभी विभागों में दिव्यांगों का परमानेंट पुराना मेडिकल प्रमाणपत्र को मान्य किया जाए।
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