हरियाणा राज्य परिवहन (रोडवेज) विभाग के क्लर्क को रिश्वत के मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए चार साल कारावास की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने दोषी कर्मचारी रविंद्र पर 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वर्ष 2017 में विजिलेंस ने रोडवेज के लेखा विभाग के दादरी में तैनात क्लर्क रविंद्र कुमार उर्फ रवि को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद विजिलेंस ने हिसार विजिलेंस थाना में केस दर्ज कराया था। एडीजे की अदालत में यह केस चलाया गया।
अदालत ने लिपिक रविंद्र कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 7 के तहत दोषी करार दिया। आरोपी को तीन साल कैद के साथ पांच हजार रुपये जुर्माना और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 के तहत पांच हजार रुपये के जुर्माने के साथ चार साल कैद की सजा सुनाई है।
दादरी जिले के बस स्टैड़ में कडंक्टर के पद पर तैनात रामेश्वर पहले कच्चे कर्मचारी के तौर पर तैनात था। उसे सरकार ने नियमों के अनुसार नियमित कर दिया गया था। रामेश्वर ने बकाया एरियर निकलवाने के लिए रोडवेज विभाग का लिपिक रविंद्र से अनुरोध किया। जिस पर लिपिक रविंद्र ने दस हजार रुपये की रिश्वत मांगी। इस पर उसने विजिलेंस को शिकायत दी।
इसके बाद भिवानी विजिलेंस विभाग के प्रभारी देवीलाल बिश्नोई के नेतृत्व में बनी टीम ने रामेश्वर को दो-दो हजार के पांच नोटों पर पाउडर लगा कर दिए। वहीं, रविंद्र ने रुपये के लिए रामेश्वर को बस स्टैंड के पास एक दुकान में बुलाया। जब रविंद्र रिश्वत की राशि ले रहा था जो विजिलेंस टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया था।