कृषि कानून वापस लेने की मांग को लेकर हरियाणा राजस्थान के खेड़ा बॉर्डर पर धरनारत किसानों ने आज से अपने तंबू उखाड़ने शुरू कर दिए हैं। वे शुक्रवार को वहां पर धन्यवाद कार्यक्रम कर लोगों का आभार व्यक्त करेंगे जिन्होंने आंदोलन में अपना सहयोग दिया है। कृषि कानून वापस होने पर किसान खुश हैं और इसे अपनी जीत करार दे रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ गंगायचा टोल प्लाजा पर धरनारत किसान 11 दिसंबर तक वहां रहेंगे। फिर 11 को ही धन्यवाद कार्यक्रम आयोजित कर वहां से अपना तंबू उखाड़ेंगे। किसानों के टोल प्लाजा से हट जाने के बाद टोल फिर से चालू हो जाएगा। अभी तक जो वाहन चालक टोल फ्री का मजा ले रहे थे, उनको फिर से टोल देने के बाद ही यात्रा करने की अनुमति दी जाएगी।
अन्य खबरें पढ़ें...
हरियाणा: निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देती याचिका पर हरियाणा सरकार को नोटिस
हरियाणा में निजी क्षेत्र की नौकरियों में स्थानीय निवासियों के लिए 75 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य करने के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
पढ़ें विस्तृत खबर...
किसान आंदोलन स्थगित: हरियाणा पंजाब के नेताओं ने बताई किसानों की जीत, जानिए किसने क्या कहा
26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने 378 वें दिन गुरुवार को घर वापसी का एलान कर दिया है। सरकार ने करीब किसानों की सभी मांगें मान ली है। किसानों की प्रमुख मांग कृषि कानूनों की वापसी थी, जिसे सरकार ने पहले ही मान लिया था। अब केंद्र के एक प्रस्ताव पर एसकेएम और सरकार की सहमति बन गई है। किसानों ने 11 दिसंबर को घर वापसी करने का एलान किया है। इतने लंबे चले आंदोलन पर अब राजनीतिक बयान भी आने शुरू हो गए हैं।
पढ़ें विस्तृत खबर...
संयुक्त किसान मोर्चा: हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद जवानों व आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को 10 तारीख को देंगे श्रद्धांजलि
सोनीपत के कुंडली बॉर्डर पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा किसान आंदोलन 378 दिन बाद खत्म हो गया। गुरुवार को किसानों की मांग मानने वाला केंद्र सरकार का आधिकारिक पत्र मिलने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बैठक कर घर वापसी का एलान किया।
पढ़ें विस्तृत खबर...
विवादों से भी रहा आंदोलन का नाता: बंगाल की युवती से दुष्कर्म तो दलित की हत्या सहित ये रहे प्रमुख मामले
एक साल से लंबे चले किसान आंदोलन में कईं उतार चढ़ाव आए। आंदोलन कई विवादों से भी जुड़ा। इसमें लाल किला हिंसा के बाद बहादुरगढ़ में टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन स्थल पर बंगाल की युवती से दुष्कर्म का मामला भी काफी चर्चा में रहा। इस मामले में अभी भी जांच जारी है। इसके अलावा टिकरी बॉर्डर पर ही युवक को जिंदा जलाने की घटना की भी काफी निंदा हुई। वहीं कुछ समय पहले कुंडली बॉर्डर पर निहंगों ने बेअदबी का आरोप लगाते हुए पंजाब के लखबीर सिंह की हत्या कर शव को आंदोलन की स्टेज के पास लटका दिया था। इसके बाद एक निहंग पर मुर्गे के लिए रेहड़ी वाले को पीट पीटकर उसकी टांग तोड़ने का मामला भी सामने आया। आंदोलन में विदेशी मदद व साजिश होने के भी आरोप लगते रहे। टूलकिट मामला भी देशभर में चर्चा का विषय बना।
पढ़ें विस्तृत खबर...
किसानों के संघर्ष की जीत: एक दूसरे को गले मिलकर दे रहे बधाई, टिकरी बॉर्डर पर बांटी मिठाइयां
378 दिन से चल रहे किसान आंदोलन की समाप्ति के एलान के बाद किसानों के चेहरे खिले हुए हैं। किसानों को इस बात की खुशी है कि उनका संघर्ष खराब नहीं गया। टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन समाप्ति का एलान होने के बाद किसानों ने एक दूसरे को गले मिलकर बधाई दी व बॉर्डर पर मीठाई भी बांटी गई। किसानों ने बॉर्डर से सामान समेटना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि सरकार के खिलाफ इतना लंबा संघर्ष जीतना उनके लिए बड़ी बात है। आंदोलन में किसानों के धैर्य के आगे सरकार को झुकना पड़ा है।
पढ़ें विस्तृत खबर...