हरसिमरत कौर और दीपेंद्र सिंह हुड्डा
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26 नवंबर 2020 से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानों ने 378 वें दिन गुरुवार को घर वापसी का एलान कर दिया है। सरकार ने करीब किसानों की सभी मांगें मान ली है। किसानों की प्रमुख मांग कृषि कानूनों की वापसी थी, जिसे सरकार ने पहले ही मान लिया था। अब केंद्र के एक प्रस्ताव पर एसकेएम और सरकार की सहमति बन गई है। किसानों ने 11 दिसंबर को घर वापसी करने का एलान किया है। इतने लंबे चले आंदोलन पर अब राजनीतिक बयान भी आने शुरू हो गए हैं।
शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने कहा कि 'मैं आज किसानों को उनकी जीत पर बधाई देती हूं। लेकिन, कृषि कानूनों के खिलाफ अपने साल भर के विरोध प्रदर्शन के दौरान 700 किसानों की जान चली गई। हम हमेशा किसानों के साथ खड़े रहेंगे।'
दीपेंद्र सिंह हुड्डा कहा कि यह ऐतिहासिक आंदोलन की ऐतिहासिक जीत है। अब समय आ गया है कि एमएसपी को कानूनी रूप दिया जाए। बहुत मांगों को सरकार ने लिखित रूप से स्वीकार किया है, उसपर सरकार की क्या नजर रहती है, उसपर हमारी नजर रहेगी। हमारें होठों पर मुस्कान है लेकिन आंखें नम हैं।
वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर किसानों के जश्न मनाते हुए फोटो शेयर किए हैं। उन्होंन लिखा की किसान जीत गए, वाहेगुरू जी का शुक्रिया, किसान मजदूर एकता जिंदाबाद।
सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि सारी जत्थबंदियां घर वापसी कर रही है यह बड़ी जीत पंजाब के किसानों और देश के किसानों की है। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल की ओर से सभी किसानों को इस जीत की बधाई दी।
ये जीत दिल्ली की सीमाओं पर एक साल से ट्रॉलियों में बैठे अन्नदाता की है। यह किसान की नस्ल व फसल बचाने की लड़ाई थी न कि कोई राजनीतिक लड़ाई। इसे अन्नदाता ने त्याग व तपस्या से जीता है। मैं इस किसान आंदोलन में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग देने वाले प्रत्येक व्यक्ति का धन्यवाद करता हूं और अपने प्राणों की आहुति देने वाले किसानों को नमन करता हूं। आपका ये बलिदान सदियों तक याद रखा जाएगा। - बलराज कुंडू, विधायक महम (हरियाणा)