लोकसभा चुनावों के दौरान कई प्रत्याशियों ने जिलाध्यक्षों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इनमें भितरघात से लेकर वित्तीय गड़बड़ी तक के आरोप हैं। खासकर हिसार और सिरसा में यह मामले हैं। इनके अलावा, गुरुग्राम, सोनीपत व अन्य जिलों के मामले हाईकमान के पास पहुंचे हैं। संभावना है कि प्रदेशाध्यक्ष के साथ ही कई जिलाध्यक्षों को बदला जा सकता है और जिन्होंने लोकसभा चुनावों में अच्छा काम किया है, उनको जिलाध्यक्ष के रूप में तोहफा दिया जा सकता है।
इस समय भाजपा में राज्यसभा सदस्य कृष्ण लाल पंवार, पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल और बंतो कटारिया के अलावा पूर्व मंत्री कृष्ण बेदी व अशोक तंवर के नाम शामिल हैं। भाजपा के सूत्रों का दावा है कि सुनीता दुग्गल और बंतो कटारिया के नाम पर मंथन चल रहा है और दोनों महिलाओं में एक को कमान दी जा सकती है। दूसरा धड़ा, कृष्ण पाल पंवार के लिए भी जोर आजमाइश कर रहा है, क्योंकि वह पूर्व में मंत्री रह चुके हैं और उनके पास राजनीतिक का लंबा तजुर्बा है। लेकिन हाईकमान भाजपा कैडर के ही किसी व्यक्ति को कमान सौंपने की मंशा रखता है।
जाट चेहरों की बात करें तो राज्यसभा सदस्य और दो बार के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का नाम सबसे ऊपर है। क्योंकि वह मनोहर लाल के विश्वासपात्र हैं। हालांकि, इस पद के लिए पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ के नाम भी चल रहे हैं। लेकिन कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ मनोहर लाल के करीबी नहीं है, इसलिए इनके नाम पर मुहर लगना कम लग रहा है। क्योंकि बराला पहले भी दो बार प्रदेशाध्यक्ष रहे हैं और दोनों बार हरियाणा में भाजपा की सरकार बनाने में कामयाब रहे हैं।