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चालान से भड़के ट्रक चालक, आरटीए गेट पर जड़ा ताला

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आरटीए कार्यालय का गेट बंद करके धरने पर बैठे ऑपरेटर्स से बात करते पुलिसकर्मी। - फोटो : Fatehabad
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फतेहाबाद। कई दिनों से आरटीए प्रशासन के खिलाफ भड़ास निकाल रहे ट्रक मालिकों का आखिरकार बुधवार को सब्र टूट गया। ट्रकों के कागजात पूरे होने के बावजूद चालान काटने का आरोप लगाकर ट्रक मालिकों व चालकों ने आरटीए कार्यालय पर ताला जड़ दिया। ट्रक मालिकों ने अपने ट्रक सरेंडर करने की बात कहते हुए आरटीए कार्यालय में खड़े कर दिए। बाद में गुस्साए ट्रक मालिक व चालक आरटीए कार्यालय के मुख्य गेट को ताला लगाकर उसके आगे धरने पर बैठ गए।
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बता दें कि करीब पांच घंटे तक आरटीए कार्यालय पर प्रदर्शन चलता रहा, इस दौरान ट्रक मालिकों ने आरटीए अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की। बाद में शहर थाना पुलिस के कर्मचारियों ने भी मौके पर आकर ट्रक मालिकों को समझाने का प्रयास किया। आखिरकार सूचना पाकर हिसार से आरटीए सचिव डॉ. सुनील ढाका मौके पर पहुंचे। जजपा जिलाध्यक्ष सुरेंद्र लेगा, चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिवाच ने ट्रक ऑपरेटर्स के साथ आरटीए सचिव से करीब एक घंटे तक चर्चा करके मामले का निपटान करवाया। वहीं चालकों ने आरोप लगाया कि आरटीए सचिव गब्बर सिंह बने हुए हैं। अपना एकछत्र राज चलाने में लगे हुए हैं। उनकी मनमर्जी के कारण चालकों की परेशानी बढ़ी हुई है। खड़ी गाड़ी के भी चालान करवा रहे हैं। सरासर अन्याय हो रहा है। सरकार को सुनवाई करनी चाहिए।
किसी का 50 हजार तो किसी का 26 हजार का काटा चालान
जानकारी के अनुसार आरटीए स्टाफ ने ट्रक ऑपरेटर जगदीश के ट्रक का 50 हजार रुपये का चालान काट दिया। जगदीश का कहना था कि उन्होंने टैक्स भरा हुआ है। इसके बावजूद चालान काट दिया गया। बाद इसके अलावा ट्रक मालिक हरपाल सिंह के ट्रक का भी 50 हजार रुपये का चालान कर दिया। हरपाल सिंह का कहना था कि उनके ट्रक के सारे दस्तावेज पूरे हैं। इसके बावजूद चालान काटे जा रहे हैं। अहरवां के पास खान मोहम्मद निवासी चालक वीरेंद्र सिंह की गाड़ी का भी ओवरलोडिंग बताकर 26 हजार रुपये का चालान काट दिया। चालकों व ट्रक मालिकों ने कहा कि आरटीए प्रशासन की कार्रवाई से वे दुखी हो चुके हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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10 हजार रुपये दे देते हैं, तो छोड़ देते हैं
आरोप है कि आरटीए अधिकारी गाड़ी रुकवाते हैं। जब कागजात पूरे होने की बात कही जाती है, तो भी 50 हजार के चालान का डर दिखा देते हैं। अगर कोई 10 हजार रुपये दे दे तो छोड़ दिया जाता है। ज्यादा बहस करें तो सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप में केस दर्ज करवाने की धमकी दी जाती है। हमारी हक की बात भी सुनवाई नहीं होती।
चालक का आरोप, आरटीए अधिकारी करते हैं मारपीट
एक युवा चालक वीरेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि आरटीए अधिकारी चालान करने के साथ-साथ मारपीट भी करते हैं। मारपीट का अधिकार उन्हें किसने दिया है। वह सरासर ज्यादती है। रतिया में मंगलवार को उसका चालान किया गया और मारपीट की गई। रतिया हैफेड कार्यालय में उसकी गाड़ी को बंद करवा दिया।
10 दिन हो गए गाड़ी बिना पासिंग खड़ी है
एक चालक ने बताया कि उनकी गाड़ी 10 दिनों से बिना पासिंग खड़ी है। उन्होंने पूरे कागजात लगाकर फाइल जमा करवाई हुई है। मगर पासिंग नहीं हो रही है। गाड़ी किश्तों पर ली हुई है। दस दिन से गाड़ी नहीं चलने से किश्त की राशि भी पूरी नहीं हो पा रही है। दलालों का काम हो जाता है, लेकिन चालकों को चक्कर कटवाए जाते हैं।
साहब आते नहीं, स्वीकृति मिलती नहीं
चालकों ने बताया कि हिसार के आरटीए सचिव को फतेहाबाद का अतिरिक्त कार्यभार मिला हुआ है। वह महीने में दो दिन ही आते हैं। दो महीने से चालकों ने परमिट की फीस कटवाई हुई है। मगर स्वीकृति नहीं मिल रही है। स्वीकृति न मिलने के कारण गाड़ियां रोड पर नहीं चल सकती है।
यह निकला समाधान
जजपा नेताओं के साथ ट्रक ऑपरेटर्स ने आरटीए सचिव डॉ. सुनील ढाका के साथ बैठक की। बैठक में तय हुआ कि जगदीश के ट्रक के काटे गए चालान को रद्द करवाने के लिए मुख्यालय को लिखा जाएगा।
कोट
आरटीए प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई कर रहा है। कोई तकनीकी कारण से दिक्कत है, तो उसका समाधान करवा दिया जाएगा। दस्तावेज जिसके पूरे हैं, उनका चालान नहीं हो रहा है। बाकी किसी भी प्रकार की फाइल पेंडिंग नहीं है। ऑपरेटर्स से बातचीत हुई थी, उनको समझा दिया गया है।
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-सुनील ढाका, आरटीए सचिव
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