भूना। रामलीला ग्राउंड भूना में एक चौपाल भवन के विवाद को लेकर वीरवार को अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों ने विधायक दुड़ाराम व नगर पालिका चेयरपर्सन अर्पणा पंकज पसरीजा का शहीद उधम सिंह चौक पर पुतले फूंककर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने दोनों ही पुतलों को कंधे पर उठाकर शहर में शव यात्रा निकाली और खील बिखेरकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी नगर पालिका अधिकारियों का घेराव करने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें मुख्य गेट पर रोक लिया। थानाध्यक्ष ने अधिकारियों से मिलने के लिए चार लोगों को अंदर जाने के लिए अनुमति दी।
नगर पालिका सचिव व अनुसूचित जाति के प्रतिनिधि मंडल की बातचीत के बाद विवादित चौपाल को नगर पालिका ने अपने अधीन कर लिया। दो सप्ताह के अंदर चौपाल भवन में रखे हुए रामलीला कमेटी के सामान को खाली करवाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। अनुसूचित जाति वर्ग के हरपाल सिंह, भीम आर्मी हिसार के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भानखुड़, दिनेश बौद्ध, टेकराम रामगढ़िया, रमन क्रांतिकारी, अजय नायक, संतोष देवी, सुमन देवी, रोशन लाल आदि की नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुषों ने एससी चौपाल को खाली करवाने के लिए दिनभर हंगामा किया। भीम आर्मी हिसार के पूर्व जिला अध्यक्ष प्रदीप भानखुड़ ने आरोप लगाया है कि रामलीला कमेटी ने पिछले कई महीनों से एससी समाज के लिए सरकार की अनुदान से बनाई गई चौपाल पर अवैध तरीके से कब्जा किया हुआ है, जिसमें नगर पालिका के चेयरपर्सन रामलीला कमेटी को संरक्षण दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि एससी चौपाल भवन उनके समाज के लोगों के लिए मददगार साबित हो रही थी। समाज के सुख दुख में आयोजित कार्यक्रम चौपाल भवन में ही किए जाते रहे हैं, लेकिन रामलीला कमेटी ने कुछ दिनों के लिए सामान रखने के लिए उपरोक्त एससी चौपाल भवन समाज के लोगों से पूछ कर ली थी। मगर अब उन्होंने खाली करने से इन्कार करके कब्जा कर लिया है। इसलिए एससी चौपाल भवन को लेकर खाली करवाने के लिए पिछले कई दिनों से नगर पालिका चेयरपर्सन व विधायक तथा अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी। भानखुड़ का आरोप है कि इस चौपाल भवन विवाद को चेयरपर्सन प्रतिनिधि अपने समाज को फायदा पहुंचाने के लिए संरक्षण दे रहे हैं, जिसका एससी समाज खुलकर विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा कि विधायक भी मूकदर्शक बने हैं, जिसका जवाब आने वाले चुनाव में दिया जाएगा।
विवादित चौपाल को नगर पालिका अपने कब्जे में लेगी
अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के विरोध के बाद नपा अधिकारियों व संघर्ष समिति की संयुक्त बैठक में फैसला हुआ कि दो सप्ताह के अंदर कानूनी प्रक्रिया अपनाकर विवादित चौपाल भवन को खाली करवाकर नगर पालिका अपने कब्जे में लेगी। लेकिन जब तक मामले का समाधान नहीं होगा तब तक किसी भी पक्ष को चौपाल भवन उपयोग के लिए अधिकार नहीं दिया जाएगा। नगर पालिका के सचिव नवीन पांडे व थानाध्यक्ष रामपाल लोहचब ने प्रदर्शनकारियों को यह जानकारी देकर शांत किया। उन्होंने बताया कि पुराने समय में ग्राम पंचायत भूना द्वारा चौपाल भवन के प्रस्ताव पारित से संबंधित दस्तावेज परखे जाएंगे और रिकॉर्ड जिस भी पक्ष में होगा, उसे विवादित चौपाल भवन सौंपने पर विचार विमर्श किया जाएगा।
एससी वर्ग का है चौपाल भवन : बौद्ध
एडवोकेट कुलदीप बौद्ध व दिनेश बौद्ध ने बताया कि रामलीला ग्राउंड के पास वर्षों पहले सरकार ने एससी चौपाल का निर्माण करवाया था। परन्तु सितंबर 2023 में बाढ़ के दौरान रामलीला कमेटी ने सामान चौपाल में रख लिया था। इसके बाद से ही एससी चौपाल पर कब्जा हो गया।
चौपाल भवन के लिए रामलीला कमेटी के नाम पर मिली थी ग्रांट : चेयरपर्सन
नगर पालिका की चेयरपर्सन अर्पणा पंकज पसरीजा ने कहा कि पूर्व सांसद डॉ. सुशील इंदौरा ने वर्ष 2001-02 में रामलीला कमेटी को चौपाल के लिए 175000 अनुदान राशि दी थी, जिसका रिकॉर्ड उपलब्ध है। परंतु फिर भी हर दस्तावेज की जांच कर रहे हैं। लेकिन धक्काशाही और दबाव की राजनीति नहीं होनी चाहिए। चेयरपर्सन ने कहा कि उन्होंने किसी को कोई संरक्षण नहीं दिया, जो है लोगों के सामने है।