जंग की दहशत के बीच से भारतीय नागरिकों का यूक्रेन से निकलकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के यूक्रेन में रहने वाले 45 नागरिकों में से 20 के सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की सूचना प्रशासन को मिल चुकी है। स्वदेश आने की आस में इनमें से कुछ नागरिक रोमानिया तो कुछ पोलैंड में ठहरे हुए हैं। जहां से उन्हें भारत सरकार दिल्ली तक पहुंचाने की व्यवस्था में लगी हुई है।
उधर, उपायुक्त प्रदीप कुमार ने यूक्रेन गए जिले के नागरिकों की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए तहसीलदारों की ड्यूटी लगा दी है। इसके बाद से तहसीलदारों द्वारा विद्यार्थियों के परिजनों के माध्यम से जानकारी हासिल कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। गौरतलब है कि गुप्तचर विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले के 45 नागरिकों के यूक्रेन में होने की जानकारी प्रशासन को मिली थी।
इनमें से ज्यादातर एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए थे। बता दें कि कर्नाटक निवासी एक छात्र की यूक्रेन में गोलीबारी में मौत होने के बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई है। अभिभावक सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यूक्रेन के हालातों को देखकर हर परिजन परेशान है। जब तक सभी नागरिक वापस नहीं आ जाते, तब तक परिजनों को राहत नहीं मिलेगी। जब से गोलीबारी में एक विद्यार्थी की मौत की सूचना मिली है, तब से चिंता और बढ़ गई है।
यूक्रेन से निकलकर हंगरी के रास्ते दिल्ली पहुंचा गांव समैन का अमित
यूक्रेन के ओडेसा शहर में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया गांव समैन का छात्र अमित गिल बुधवार दोपहर को दिल्ली एयरपोर्ट पहुंच गया। अमित गिल सोमवार को अपने दोस्तों के साथ हंगरी बॉर्डर पर पहुंचा। हंगरी में भारत सरकार की ओर से भेजी गई फ्लाइट में सवार होकर अमित दिल्ली पहुंचा। अमित के चाचा मनजीत गिल ने बताया कि परिजनों में खुशी है कि परिवार का बेटा सकुशल लौट आया है। उन्होंने इसके लिए भारत सरकार का आभार भी जताया।
शहर के दो नागरिक रोमानिया में सुरक्षित
तहसीलदार रणविजय सुल्तानिया के अनुसार शहर के दो नागरिकों के रोमानिया में होने की पुष्टि हुई है। दोनों वहां सुरक्षित हैं। अब उन्हें रोमानिया से दिल्ली तक भेजने की व्यवस्था की जा रही है।
टोहाना के तीन छात्रों की सूचना मिली
टोहाना के नायब तहसीलदार रमेश कुमार ने बताया कि फिलहाल उन्हें तीन विद्यार्थियों के यूक्रेन से भारत पहुंचने की सूचना मिली है। टोहाना उपमंडल के छह विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए थे। इनमें तीन की वतन वापसी हो गई। अन्य की जानकारी ली जा रही है।
रतिया के नागरिक पोलैंड व रोमानिया में ठहरे
रतिया प्रशासन के अनुसार रतिया क्षेत्र के गांव चंदो कलां निवासी सतनाम सिंह के दो पुत्र अमनदीप व गगन के अलावा अमनदीप की पत्नी दीक्षा और उनका एक साल का बेटा, इसी गांव के ही कुलविंदर कौर, गुरुदत्त, नागपुर के विनोद कुमार, रतिया निवासी गरिमा और सुमन युद्ध के बाद से फंसे हुए थे। चंदो कलां के छह लोग पोलैंड और अन्य रोमानिया में चले गए थे।
15 दिनों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई बंद
अपने घर लौटे विद्यार्थियों ने बताया कि ताजा हालातों के चलते यूक्रेन के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेज प्रशासन की ओर से 15 दिनों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई बंद कर दी गई है। इस कारण अब उन्हें आगे की पढ़ाई को लेकर चिंता भी सताने लगी है। फिलहाल वह परिजनों के साथ समय व्यतीत कर रहे हैं। मगर ज्यादा दिनों तक पढ़ाई को बाधित नहीं किया जा सकता है।
एक साल के लिए भरी थी साढ़े सात लाख फीस, अब बेटी के भविष्य की चिंता
यूक्रेन से बेटी को एमबीबीएस करवा रहे एक पिता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने एक साल के लिए करीब साढ़े सात लाख रुपये फीस भरी थी। मगर यूक्रेन के हालातों को देखकर समझ नहीं आ रहा कि भविष्य में वहां पहले जैसा माहौल होगा। उन्हें इतनी भारी भरकम राशि डूबने और बेटी का भविष्य खराब होने की चिंता है।
भूना निवासी छात्रा सायना अपनी मां निर्मला व पिता नौरंग राय के साथ।
सायना व प्रियाजोत अलग-अलग दिशा से भूना पहुंची
छात्रा सायना ने बताया कि पिछले पांच दिनों से रोमानिया बॉर्डर पर प्रवेश के लिए इंतजार कर रहे थे। मगर वहां के हालात ठीक नहीं है। भूखे प्यासे रहकर अपने वतन लौटने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा। सोमवार को उन्हें फ्लाइट मिली, जो रोमानिया से मुंबई और फिर दिल्ली पहुंची। फ्लाइट में 182 विद्यार्थी थे। छात्रा ने बताया कि वह सितंबर 2017 से यूक्रेन की ओडिसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी। छात्रा प्रियाजोत पोलैंड बॉर्डर पर पिछले चार दिनों से वतन लौटने के लिए संघर्ष कर रही थी। उसकी फ्लाइट बुधवार को दिल्ली पहुंची। छात्रा को उसके पिता गुरदीप सिंह भट्टी गाड़ी में लेकर आए।
अपने परिजनों के साथ यूक्रेन से लौटा रतिया निवासी विकास।
आठ दिन बाद घर लौटे गांव बुर्ज के विकास ने बताई दास्तां....
यूक्रेन पर रूस द्वारा अटैक करने के आठ दिन बाद बुधवार दोपहर को गांव बुर्ज का 23 वर्षीय युवक विकास सकुशल घर लौट आया है। विकास ने यूक्रेन में दहशत की दास्तां बताते हुए कहा कि वह नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी इवानो फ्रांकविस्क यूक्रेन में तृतीय वर्ष का छात्र है। जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो घबराहट होने लगी। अगले दिन की शाम को यूनिवर्सिटी से आठ किलोमीटर दूर एयरपोर्ट पर हमला हुआ तो वह और उसके साथ के विद्यार्थी पूरी तरह सहम गए थे।
उन्हें लगा कि शायद अब बचना मुश्किल है, उनके पास हमला होने के थोड़ी देर बाद ही यूनिवर्सिटी के अधिकारी ने आकर उन्हें बताया कि पास ही बंकर बने हुए हैं, जिसमें जाकर छिप जाओ। इसके बाद वे रात भर उस बंकर में छिपे रहे। विकास ने बताया कि इसके बाद उन्हें यूक्रेन-रोमानिया बॉर्डर एरिया पर ले जाया गया। बॉर्डर पर जाते हुए छिपते-छिपाते दो दिन का समय लगा, जो काफी कष्टदायक था। बॉर्डर पर पहुंचकर उन्हें एक दिन रखा गया। उसके बाद एयरपोर्ट के पास रोमानिया में बने शेल्टर होम में दो दिन रखा गया।
विकास ने बताया कि रोमानिया प्रशासन और लोगों ने उन्हें काफी सहयोग दिया। मंगलवार को 238 लोगों के साथ उसे भी रोमानिया एयरपोर्ट से भारत लाया गया। विकास के पिता पुलिस कर्मचारी कश्मीर कंबोज ने बताया कि जब से बेटा यूक्रेन से आया है। उसका परिवार विकास के सुरक्षित आने पर राहत महसूस कर रहा है। (संवाद)
यूक्रेन में रहने वाले जिले के 45 नागरिकों का पता चला है। इनमें से कौन फिलहाल कहां और किस स्थिति में है, इसकी जानकारी लेने के लिए सभी तहसीलदारों की ड्यूटी लगाई गई है। सभी जानकारी हासिल करने में लगे हुए हैं।
-प्रदीप कुमार, उपायुक्त, फतेहाबाद
भूना की दो छात्राएं घर लौटी, देखकर परिजन हुए भावुक
यूक्रेन के लवीव मेडिकल यूनिवर्सिटी व ओडिशा नेशनल यूनिवर्सिटी की दो छात्राएं बुधवार को घर लौट आई हैं। दोनों ही परिवारों ने राहत की सांस ली। घर पहुंचते ही अपनों को नजदीक देखकर दोनों छात्राओं की आंखों से आंसु निकल पड़े। परिजन भी भावुक हो गए। मेडिकल छात्रा प्रियाजोत अपने घर भूना में पहुंची तो दादी इंद्रकौर ने पोती को गले से लगा लिया। छात्रा की मां गुरमीतकौर व पिता गुरदीप सिंह भट्टी ने दोनों को ढांढस बंधाया। परिजनों को बताया कि वह काल से लड़कर घर पहुंची है। छात्रा प्रियाजोत इस बात को लेकर गहरे सदमे में है।
उसे चिंता है कि अब भविष्य में अपनी पढ़ाई पूरी कर पाएगी या नहीं। उड़ीसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी यूक्रेन से लौटी चतुर्थ सेमेस्टर की मेडिकल छात्रा 22 वर्षीय सायना भी भूना में अपने घर पहुंच गई है। जहां उसके शिक्षक पिता नौरंगराय व माता निर्मला ने बेटी को देखकर खुशी जताई। रोमानिया बॉर्डर पर धक्का-मुक्की के कारण छात्रा सायना जमीन पर गिर गई थी और उस पर कई लोग गिर गए, इसलिए उसके पांव पर हल्की चोट भी लगी है।