इस रिपोर्ट के मुताबिक हरियाणा में 12.5 फीसदी लोगों में डायबिटीज और 18.2 फीसदी लोगों में प्री डायबिटीज का प्रसार पाया गया। प्री डायबिटीज, डायबिटीज के पहले की स्थिति है। यदि इन लोगों ने अपने जीवन में बदलाव नहीं किया तो अगले पांच साल में यह भी डायबिटीज में बदल जाएंगे। वहीं, पीजीआई के स्कूल आफ पब्लिक ने साल 2022 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बताया गया है कि हरियाणा के 15.5 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और 26.3 फीसदी लोग हाइपरटेंशन से।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2019-2021 की रिपोर्ट ने भी हाइपरटेंशन व ब्लड शुगर को लेकर एक डाटा प्रकाशित किया था। इसके मुताबिक 13.5 फीसदी लोग डायबिटीज और 25.1 फीसदी लोग हाइपरटेंशन से पीड़ित हैं। ये सभी सर्वे बताते हैं कि हरियाणा में पिछले दस सालों में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के मरीजों में बढ़ोतरी हुई है।
पंजाब में हाइपरटेंशन के मरीज काफी ज्यादा हैं। पीजीआई की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में हाइपरटेंशन के 40.1 फीसदी मरीज हैं। वहीं आईसीएमआर की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में 51 फीसदी हाइपरटेंशन से ग्रसित मरीज हैं। वहीं डायबिटीज की स्थिति लगभग बराबर है। आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुताबिक 12.7 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि 8.7 फीसदी लोग प्री डायबिटीज से। वहीं, पीजीआई की साल 2022 की स्टडी के मुताबिक 14.6 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा थोड़ा ज्यादा है। हरियाणा में 15 फीसदी लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं।
पीजीआई के इंडोक्राइनोलॉजी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि योग भी एक तरह की एक्सरसाइज है। इससे मेंटल स्ट्रेस ठीक रहता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है। उनका कहना है कि खानपान में बदलाव और फिजिकल एक्टीविटीज करने से ब्लड शुगर और हाइपरटेंशन को नियंत्रित किया जा सकता है। योग विशेषज्ञ के मुताबिक ताड़ासन, पादहस्तासन, मंडूकासन और वक्रासन पैंक्रियाज पर असर डालते हैं। इससे इंसुलिन का उत्पादन ठीक होता है।
चंडीगढ़ डायबिटिक फुट सेंटर के निदेशक डा. संजीव भाटिया ने बताया कि भारत में डायबिटीज पीड़ितों की संख्या काफी अधिक है। लोग जांच नहीं करवाते, इसलिए रोग का पता नहीं चलता था। कोरोना में अधिकतर मरीजों ने शुगर और बीपी की जांच करवाई। इससे डाटा बढ़ा है। हालांकि यह चिंताजनक है। डायबिटीज ने सिर्फ दूसरी गंभीर बीमारियां बढ़ती हैं, बल्कि लोगों पर आर्थिक बोझ भी डालता है।