दादरी हलके के नवनिर्वाचित विधायक सुनील सांगवान व उनके पिता।
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दादरी हलके में विधानसभा चुनाव का परिणाम भाजपा के पक्ष में रहा। वहीं, भाजपा प्रत्याशी सुनील सांगवान ने यह चुनाव जीतकर अपने परिवार की 15 साल बाद सत्ता में वापसी करवाई और पिता एवं पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान को लगातार तीन हार से मिले जख्म पर भी मरहम लगाया। दादरी हलके में अब तक हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव में सुनील सांगवान ऐसे उम्मीदवार साबित हुए हैं जो भाजपा की टिकट पर पहली बार चुनाव जीते हैं। इससे पहले चुनाव में भाजपा ने दादरी की सीट कभी नहीं जीती थी। इतना ही नहीं दादरी हलके से पिता के बाद बेटा के विधायक बनने का रिकॉर्ड भी अब सतपाल और सुनील सांगवान के नाम हो गया है।
भाजपा की सीट पर दादरी से विजयी रहे भाजपा के उम्मीदवार सुनील सांगवान ने अपने पिता पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान की तरह सरकारी नौकरी से वीआरएस लेकर चुनाव लड़ा व अपने पहले ही चुनाव में जीत हासिल की। सुनील से पहले उनके पिता सतपाल सांगवान पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की प्रेरणा से राजनीति में आए थे। हरियाणा विकास पार्टी ने सतपाल को 1996 में टिकट दी थी और उससे पहले वो दूरसंचार विभाग में एसडीओ थे। वहीं, उनके बेटे सुनील सांगवान ने जेल अधीक्षक के पद से त्यागपत्र देकर चुनाव लड़ा।
सतपाल सांगवान को छह में से चार चुनाव में मिली हार
दादरी हलके के नवनिर्वाचित विधायक सुनील सांगवान के पिता एवं पूर्व मंत्री सतपाल सांगवान ने अपनी राजनीतिक कॅरिअर में 6 चुनाव लड़े। इनमें से सतपाल सांगवान ने दो चुनाव जीते जबकि चार हार गए। वर्ष 2005 के चुनाव में सतपाल सांगवान उप विजेता बने। इसके बाद वर्ष 2014 के चुनाव में वो चौथे स्थान पर रहे। वर्ष 2019 के चुनाव में वो फिर से उपविजेता बने। इस बार सुनील सांगवान ने अपना पहला ही चुनाव जीतकर परिवार की सत्ता में वापसी करवा दी है।