चरखी दादरी। दादरी जिले में विधानसभा चुनाव-2024 के परिणाम कांग्रेस के पक्ष में नहीं आए। लोकसभा चुनाव में दोनों हलकों से बढ़त लेने के चलते कांग्रेस को दादरी व बाढड़ा की दोनों खोई सीटें वापस मिलने की उम्मीद थी। लेकिन, परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस नेताओं का 19 साल बाद दादरी की सत्ता में वापसी का सपना एक बार फिर टूट गया। अंतिम बार वर्ष 2005 में दोनों सीटें कांग्रेस के खाते में गई थीं।
वर्ष 2019 में हुए चुनाव के मुकाबले वर्ष 2024 के चुनाव में दोनों हलकों में कांग्रेस का वोट बैंक बढ़ा है। वर्ष 2019 में दोनों हलकों से कांग्रेस को 47,256 वोट मिले थे जबकि वर्ष 2024 के चुनाव में दोनों हलकों से कांग्रेस को 1,13,055 वोट मिले। ऐसे में इस चुनाव में कांग्रेस को 65,800 वोट ज्यादा मिले हैं। अब अगर वर्ष 2019 के चुनाव में बाढड़ा हलके की स्थिति देखें तो कांग्रेस प्रत्याशी रणबीर सिंह महेंद्र को 39,234 वोट मिले थे। वह दूसरे स्थान पर रहे थे। वहीं, दादरी हलके में वर्ष 2019 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक मेजर नृपेंद्र सांगवान को 8,022 वोट मिले थे और वह 5वें स्थान पर रहे थे।
इस बार बाढड़ा में कांग्रेस प्रत्याशी सोमवीर को 50,430 वोट मिले। वह दूसरे स्थान पर रहे। दादरी में मनीषा सांगवान को 63,611 वोट मिले हैं।
दादरी में 2000 से कम की 7वीं और बाढड़ा में 8 हजार से कम की 10वीं जीत
चरखी दादरी। पिछले 72 साल के चुनावी इतिहास में दादरी हलके में 2,000 से कम वोटों के अंतर की सातवीं और बाढड़ा हलके में 8,000 से कम वोटों के अंतर की यह दसवीं जीत है। इस बार दोनों ही हलकों में भाजपा प्रत्याशी विजयी बने हैं। अगर दादरी हलके में पहले हुए 13 चुनावों की स्थिति देखें तो 1967 के चुनाव में विजेता और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच 1382 मतों अंतर रहा था। साल 1991 के चुनाव में मात्र 80 मतों का अंतर रहा। इसके बाद साल 2000 में 777, 2005 में 1290, 2009 में 145 व 2014 में 1,610 मतों का अंतर विजेता प्रत्याशी और निकटतम प्रतिद्वंद्वी के बीच रहा। इस बार जीत का अंतर 1957 का रहा। दो हजार से कम के अंतर की यह सातवीं जीत है। वहीं, बाढड़ा हलके की बात करें तो पिछले 13 चुनावों में से 9 में जीत-हार का अंतर 8,000 वोटों से कम रहा है। हलके में हुए वर्ष 1967 के पहले विधानसभा चुनाव में विजेता व उप विजेता के बीच 5,378 मतों का अंतर रहा था। साल 1972 व 2000 में दो बार 6 हजार से कम का अंतर रहा। इसके अलावा साल 1968 में 2712, 1977 में 1,802, 1982 में 1,097, 1987 में 4856, 2009 में 709 व 2014 में 5,006 मतों का अंतर रहा था। इस बार उमेद पातुवास 7585 वोटों से जीते हैं।