आरटीए टीम की रैकी मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपी जेल जाने से पहले।
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चरखी दादरी। आरटीए टीम की रैकी कर लोकेशन शेयर करने पर गिरफ्तार चारों आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया है। इनमें से एक आरोपी से पुलिस को जो मोबाइल बरामद हुआ था, उसमें डाटा नहीं मिला। पुलिस का अंदेशा है कि गिरफ्तारी से पहले ही आरोपियों ने डाटा डिलीट कर दिया और इसकी रिकवरी के लिए मोबाइल को नोएडा की लैब में भेजा जाएगा। मोबाइल में रिकवर डाटा के आधार पर अब पुलिस जांच को आगे बढ़ाएगी।
गौरतलब है कि गत 10 मार्च को रासीवास के समीप ओवरलोड वाहनों की जांच कर रही आरटीए टीम की रैकी करने और व्हाट्सएप ग्रुप पर लोकेशन शेयर करने का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस संबंध में डीटीओ दर्शना भारद्वाज की शिकायत पर केस दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में स्कॉर्पियो से आरटीए टीम का पीछा करने वाले चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इनके पास से एक मोबाइल भी बरामद हुआ था। जांच अधिकारी एसआई राजकुमार ने बताया कि पुलिस ने जब आरोपियों के कब्जे से बरामद मोबाइल की जांच की तो इसमें व्हाट्सएप से जुड़ा डिलीट मिला। उन्होंने बताया कि इस डाटा की रिकवरी करवाने के लिए पुलिस मोबाइल को लैब में भेजेगी। इसके बाद पता चला जाएगा कि आरोपियों ने आरटीए टीम की लोकेशन कब-कब और किन व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजी।
इनकी हुई थी गिरफ्तारी
रैकी मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और चारों आरोपी खोरड़ा के रहने वाले हैं। इनकी पहचान नरेश, मुकेश, कपिल व सुरेंद्र के रूप में हुई थी।
ओवरलोडिंग माफिया के बने हुए हैं कई ग्रुप
सूत्रों के अनुसार ओवरलोडिंग माफिया ने कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हुए हैं, जिनमें आरटीए टीम की लोकेशन शेयर कर ओवरलोड वाहनों को रूट बदलवाकर निकलवाया जाता है। आरटीए टीम की रैकी करने वालों को भी अच्छे खासे रुपये दिए जाते हैं और युवा आसानी से ओवरलोड माफिया के इस गैर कानूनी कार्य का हिस्सा बन जाते हैं।