चरखी दादरी। मानसून की बारिश किसानों की मेहनत पर भारी पड़ रही है। जिले के 17 गांव तो ऐसे हैं जहां बारिश से बाजरा, कपास, ज्वार और मूंग की फसलों को 80 से 90 फीसदी तक बर्बाद कर दिया है। वहीं, 149 गांवों में बाजरा की फसल को 50 से 70 फीसदी तक नुकसान पहुंचा है। पशुओं का हरा चारा माने जाने वाली ज्वार की फसल तो बारिश और जलभराव के चलते पूरी तरह नष्ट हो गई है। मानसून में हुई अधिक बारिश के चलते बाजरा का दाना काला पड़ गया है जबकि कपास की गांठों का रंग बदल गया है। कपास की फसल में पीला और कालापन आने से इसका असर बिक्री पर पड़ेगा। फसलों को नुकसान होने से कई किसानों के सपने टूट गए हैं।
फसलों के बदले रंगों ने किसानों के सपनों के रंग छीन लिए है। जहां किसान परिवार बेहतरी के सपने देख रहा था, अब कर्ज की चिंता सता रही है। किसी को फसल के बीच, खाद, दवाओं के लिए लिया कर्ज चुकाने की चिंता है तो किसी को बेटी या बेटे की शादी की। इस बार जिला में मानसून सीज में ज्यादा बारिश होने पर खरीफ की फसलों में दाना की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मानसून सीजन में एक जुलाई से पांच अक्तूबर तक 512 एमएम बारिश दर्ज की गई। अकेले सितंबर में 270 एमएम बारिश दर्ज की गई। इससे बाजरा के दाना की गुणवत्ता मेें काफी गिरावट आई है। बाजरा के दाने में भी कालापन आया है। जिले के 17 गांवों के खेतों में खड़ी करीब 14 हजार एकड़ फसल तो पूरी तरह नष्ट हो गई। इसके अलावा अन्य गांवों में बाजरे का दाना का पकाव भी बढ़िया नहीं हो सका। दाना की चमक व सफेद पन खत्म हो गया है। ऐसे में किसानों को इन फसलों के रेट कम मिलने की ही उम्मीद है। जिला मेें मौजूदा सीजन में बाजरा का रकबा 137500 और कपास का रकबा 86250 एकड़ है।
बारिश ने बिगाड़ा खेल
किसान हवा सिंह, मोहन, संतराम, रामअवतार, सुधीर, मनोज, ओमप्रकाश, बाजे सिंह आदि ने बताया कि सितंबर माह में ही बाजरा की फसल पकी थी और कटाई भी बारिश के दौरान ही करनी पड़ी। बीच-बीच में बारिश होती रही, जिससे कटी हुई फसल में नुकसान हुआ। बारिश से जलभराव होने पर दाना की गुणवत्ता में गिरावट आई है। बाजरा के दाना का रंग भी बदलकर कालापन में हो गया है। दाना की चमक भी खत्म हो गई है। इसी प्रकार जिन भागों में कपास की खेती बारिश से बच गई वहां उसकी गांठ में भी काला एवं पीलापन बन गया है।
इन गांवों में 90 फीसदी तक फसलों का हुआ नुकसान
बारिश से कंहेटी, सरूपगढ़, समसपुर, भागवी, इमलोटा, मोरवाला, बिगोवा, सांतौर, नीमली, फतेहगढ़, छपार, बिरही कलां, खातीवास, खेड़ी सनसनवाल, घिकाड़ा, साहुवास आदि गांवों में फसलों को काफी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग के सर्वे के अनुसार इन गांवों में फसलों को 80 से 90 फीसदी तक नुकसान हुआ है।
नुकसान की भरपाई के लिए सैंपल सर्वे शुरू
जिन किसानों ने फसलों का बीमा करवाया था, उनकी फसल में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सैंपल सर्वे की जा रही है। सूत्रों के अनुसार गिरदावरी कुछ स्पेशल गांवों में करवाए जाने की योजना है। बाढड़ा क्षेत्र के कुछ गांवों में टीमें भी नुकसान का आकलन करने के लिए खेतों में पहुंची हैं।
किसान बोले : एमएसपी पर बाजरा खरीदे सरकार
किसान भोलूराम, धारे सिंह, सुरेंद्र कुमार, सुखवीर सिंह का कहना है कि बाजरा की कटाई करते ही यह भीग गया, जिससे दाना खराब हुआ है। किसान को काफी नुकसान हुआ है। सरकार को भावांतर योजना की बजाय बाजरा की सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीदना चाहिए, ताकि किसान के नुकसान की भरपाई हो सके। सरकार को प्रति क्विंटल बोनस दिए जाने की व्यवस्था करनी चाहिए। नमी की मात्रा व गुणवत्ता के मापदंड में छूट का प्रावधान करना चाहिए।
किसानों के टूटे सपने:
कोई नहीं बना पाएगा घर तो कोई बेटी की शादी के लिए चिंतित
केस:1- मकान का पुनर्निर्माण न करवाने का मलाल
भागवी निवासी किसान सुरेंद्र ने बताया कि मकान पुराना होने के चलते जर्जर है। उसने सोचा था कि बाजरा की अच्छी पैदावार होने पर दाम ठीक मिलेंगे और फिर मकान का निर्माण करवा देगा। इस बार पूरी फसल ही तबाह हो गई और खेतों में अभी भी पानी भरा है। मलाल है कि मकान का पुनर्निर्माण नहीं करवाया पाया
केस:2- फसल हुई खराब, बेटी की शादी की चिंता
नीमली निवासी दिलबाग ने बताया कि उसने पांच एकड़ में बाजरा की बिजाई की थी। अधिक बारिश और जलभराव से पूरी फसल नष्ट हो गई। नवंबर में बेटी की शादी है और सोचा था उससे पहले फसल बेचकर रुपयों का जुगाड़ कर लेगा। फसल से तो लागत भी वसूल नहीं हुई और अब कर्ज लेकर बेटी की शादी करनी पड़ेगी।
कटाई एवं कढ़ाई के दौरान लगातार बारिश होने की वजह से बाजरा की दाना की गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। दाना की चमक कम हुई है और इसका असर रेट पर पड़ेगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह, कृषि विशेषज्ञ
जलमग्न कपास का खेत।- फोटो : CharkhiDadri